Thursday, June 20, 2024
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‘ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं PM मोदी, BJP को अर्थव्यवस्था की भी समझ नहीं’: कपिल सिब्बल के शो में सुब्रह्मण्यम स्वामी, दोनों को सरकार में न होने का मलाल

'द वायर' पर सेंट्रल हॉल विद कपिल सिब्बल नामक एक नए टॉक शो में कॉन्ग्रेस नेता सिब्बल और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की भारतीय अर्थव्यवस्था और पीएम मोदी की शिक्षा पर गुफ्तगू में कहा वो कम पढ़े हैं। बीजेपी सरकार को अर्थव्यवस्था जानकारी नहीं।

कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और सीनियर वकील कपिल सिब्बल अब नए अवतार में हैं। वो अब इंटरव्यू देने नहीं, बल्कि इंटरव्यू लेने वाले बन गए हैं। दरअसल, उन्होंने वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ पर ‘सेंट्रल हॉल विद कपिल सिब्बल’ नामक एक टॉक शो शुरू किया है। इसका पहला एपिसोड 29 दिसंबर 2023 को यूट्यूब पर स्ट्रीम किया गया।

इस शो में कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस शो में दोनों ‘अर्थव्यवस्था के हालात’ टॉपिक पर बात करते करते हैं। इस शो की खास बात ये है कि इसमें कॉन्ग्रेसी नेता सिब्बल अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने से नहीं चूकते हैं। हालाँकि शो में उनकी ये कोशिश धरी रह गई, क्योंकि इस मुद्दे पर आँकड़ों ने उन्हें आईना दिखा दिया।

इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था का अच्छा प्रदर्शन बगैर कहें ही बहुत कुछ कह रहा था। इस पर जब सिब्बल से कुछ कहते नहीं बना तो उन्होंने ये तो माना कि देश की अर्थव्यवस्था खुद से ही बेहतर कर रही है, लेकिन खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे के तरह ये कहने से बाज नहीं आए कि मौजूदा सरकार अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ नहीं जानती है।

इस शो में दोनों नेताओं के बीच बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स से शुरू हुई। सिब्बल ने कहा कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था AI को अपना रही है। उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा कि इस क्षेत्र में भारत के लिए क्या चुनौतियाँ होंगी। इस पर स्वामी ने जवाब दिया कि भारत इस चुनौती का अच्छी तरह से सामना कर सकता है।

उन्होंने दावा किया कि नासा (NASA) एआई कार्यक्रमों में संस्कृत का इस्तेमाल करने के लिए शोध कर रहा है। अर्थशास्त्री स्वामी ने ये भी दावा किया कि नासा रोबोटों के लिए अंग्रेजी के बजाय संस्कृत को प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि संस्कृत में एक ही वर्तनी यानी स्पैलिंग के लिए अलग-अलग उच्चारण नहीं हैं, जैसे कि बट (But) और पुट (Put)।

इस मामले में ये बात गौर करने लायक है कि लंबे वक्त से इंटरनेट पर अफवाह है कि नासा AI और रोबोटिक्स के लिए संस्कृत पर शोध कर रहा है और यह काफी हद तक निराधार है। नासा एक अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है। ये आवाज पहचान प्रणालियों में सक्रिय तौर से शामिल नहीं है और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसी AI में संस्कृत के इस्तेमाल पर शोध कर रही है।

दरअसल, इस अफवाह की जड़ 1985 में नासा के एक सहायक वैज्ञानिक का छपा एक शोध पत्र है। इसका शीर्षक था ‘संस्कृत में ज्ञान प्रतिनिधित्व और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’। यह वैज्ञानिक का नितांत निजी काम था और इसका कोई सुबूत नहीं है कि नासा ने इस विषय पर कोई और अध्ययन किया हो।

शो में बात को आगे बढ़ाते हुए कॉन्ग्रेसी नेता सिब्बल से बीजेपी नेता स्वामी ने कहा कि भारतीयों ने Y2K परेशानी का समाधान कर लिया है और पश्चिम को भविष्य में भी भारत पर निर्भर रहना होगा। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह देश के नेतृत्व पर निर्भर करेगा। दरअसल, Y2K साल 2000 के बाद तारीखों के लिए कैलेंडर डेटा की फॉर्मेटिंग और स्टोरेज से जुड़ी संभावित कंप्यूटरीकृत गलतियों से जुड़ा था।

स्वामी ने आगे कहा, “यदि आपके पास बेवकूफ नेतृत्व है…”। इस बीच सिब्बल ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि क्या वह ये कह रहे हैं कि मौजूदा नेतृत्व बेवकूफ है। इस पर स्वामी ने जवाब दिया कि आज के नेतृत्व में कोई विद्वान नहीं हैं।

जब कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार में उच्च शिक्षित लोग हैं तो स्वामी ने जवाब दिया, “तो उनमें प्रधानमंत्री को यह बताने का दम होना चाहिए, जो कि उच्च शिक्षित नहीं हैं। मुझे नहीं पता कि वह किस विषय में उच्च शिक्षित हैं…।” दरअसल स्वामी साफ तौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा की ओर इशारा कर रहे थे।

इस दौरान सिब्बल बातचीत का रुख दूसरे टॉपिक्स की तरफ मोड़ते, उससे पहले ही स्वामी को जो बोलना था वो बोल चुके थे। हालाँकि फिर दोनों नेता अर्थव्यवस्था पर बातचीत करने लगे। स्वामी ने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के करीब भी नहीं है। बता दें कि पीएम मोदी ने भारत को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।

इस शो के दौरान स्वामी को सिब्बल को अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ बुनियादी बातें सिखानी चाहिए थीं। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था खराब है, क्योंकि देश में प्रति व्यक्ति जीडीपी की संख्या कम है। इसके लिए सिब्बल ने ब्राजील और इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में भारत के मुकाबले प्रति व्यक्ति जीडीपी अधिक है।

उन्होंने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति जीडीपी संख्या कम होने से निवेश करने के लिए पैसा नहीं है। इस पर स्वामी ने उन्हें समझाते हैं कि अर्थव्यवस्था को प्रति व्यक्ति नहीं, बल्कि कुल सकल घरेलू उत्पाद संख्या में मापा जाना चाहिए। स्वामी ने आगे बताया कि निवेश को मापने के लिए प्रति व्यक्ति नहीं, बल्कि जीडीपी को लेना होगा।

हालाँकि, इसके बाद भी स्वामी ने मोदी सरकार पर हमला जारी रखा और दावा किया कि मौजूदा सरकार में कोई भी अर्थशास्त्र के बारे में कुछ भी नहीं समझता है। उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों को कुछ नहीं पता, सब कुछ नौकरशाह ही चलाते हैं और मंत्री सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पीएमओ के पास एक अधिकारी है, जिन्होंने साल 1972 में लंदन से विकासात्मक अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है, लेकिन ये अब प्रासंगिक नहीं है। स्वामी ने दावा किया कि सरकार के पास कुछ अच्छे आर्थिक सलाहकार थे, लेकिन उनमें से ज्यादातर चले गए, क्योंकि सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। स्वामी ने सरकार के जारी जीडीपी आँकड़ों पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ‘द हिंदू’ में लिख रहे हैं, लेकिन कोई उन्हें नहीं पढ़ता है। स्वामी ने कहा कि नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया और ऐसा परिवर्तन अब नहीं हो रहा है। स्वामी ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनके काम के लिए उचित श्रेय नहीं मिलता है। मौजूदा सरकार को सिर्फ राजनीति की फिक्र है, अर्थव्यवस्था की नहीं।

शो में सिब्बल और स्वामी दोनों के इस निष्कर्ष पर पहुँचने के बाद कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था नहीं चला सकती, दोनों एक-दूसरे को वित्त मंत्री बनाने की सिफारिश करने लगे। स्वामी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चीन सहित कई अन्य प्रमुख देशों के मुकाबले में बेहतरीन बनावट में है और हम इसमें बदलाव ला सकते हैं।

इस पर सिब्बल ने कहा, “अगर हमारे पास आप जैसे लोग हों तो हम ये कर सकते हैं।” इस पर स्वामी ने तुरंत जवाब दिया, “या आप भी।” स्वामी ने दावा किया कि सिब्बल कानून जानते हैं, इसलिए वह भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने के काबिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी कम हो गई है, क्योंकि अब सारा कर केंद्र वसूलता है।

स्वामी और सिब्बल ने ये भी दावा किया कि सरकार राजनीतिक वजहों से कर संग्रह पर एकाधिकार रख रही है। जब सिब्बल ने स्वामी से पूछा कि अगर उन्हें 2024 में सत्ता मिलती है तो वे क्या करेंगे तो स्वामी ने जवाब दिया कि वह आयकर खत्म कर देंगे और फिर ब्याज दरें कम कर देंगे। आखिर में स्वामी ने कहा, “आपको और मुझे सरकार में होना चाहिए।” फिर सिब्बल ने यह कहकर हँसते हैं कि ये असंभव लगता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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