देश की जनता पर है स्वरा भास्कर को शक, और बातें लोकतंत्र बचाने की करती हैं…

"BASICALLY… अगर लोकसभा की 543 सीटों पर भी भाजपा जीत जाती है, तब भी यह पार्टी कट्टर ही रहेगी, धर्मांध ही रहेगी।"

लगभग सभी न्यूज चैनल्स के एग्जिट पोल पर एनडीए के समर्थन में पूर्वानुमान देखकर मोदी विरोधियों के सुर बदलने लगे हैं। जो लोग कल तक इस बात का शोर मचा रहे थे कि इन लोकसभा चुनावों में जनता मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी, वही लोग अब अपनी पिछली बातों को सही साबित करने के लिए तरह-तरह की उलाहनाएँ दे रहे हैं। इसी सूची में फिल्म जगत का एक जाना-माना चेहरा स्वरा भास्कर भी शामिल हैं।

यूँ तो आपने चुनावी माहौल में स्वरा को पिछले दिनों उनके ‘दोस्त’ कन्हैया कुमार के समर्थन में प्रचार करते देखा होगा। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों की रैली में शामिल होते देखा होगा या फिर लोगों के पोस्ट पर जाकर मोदी के लिए वोट न देने की अपील करते देखा होगा। लेकिन एग्जिट पोल आने के बाद आप स्वरा को नहीं बल्कि उनका एक नया ट्वीट देखिए! जिसमें उन्होंने किसी द्वेपान मित्रा का ट्वीट रिट्वीट करते हुए “BASICALLY…” लिखा है। द्वेपान के मुताबिक अगर लोकसभा की 543 सीटों पर भी भाजपा जीत जाती है, तब भी यह पार्टी कट्टर ही रहेगी, धर्मांध ही रहेगी। और स्वरा ने इसे शेयर करके इस बात पर अपनी सहमति जताई है।

इस ट्वीट पर स्वरा ने ‘बेसिकली’ लिखकर जहाँ भाजपा के ख़िलाफ़ अपनी कुंठा व्यक्त की, वहीं इस एक शब्द ने स्वरा और उनकी ‘क्रांतिकारी’ सोच पर सवालिया निशान लगा दिए। द्वेपान के इस ट्वीट को शेयर करके वो खुद ही अपनी बातोंं में फँस गईं। एक ओर जहाँ वो जनता के बीच जाकर लोकतंत्र और देश को बचाने की बातें करती रहीं, वहीं इस पोस्ट में वो देश की जनता पर अप्रत्यक्ष रूप से उंगली उठाती दिखीं। उन्होंने 543 सीटों पर भाजपा के आने की एक कल्पना की और कहा अगर ऐसा होता भी है तो भी वो पार्टी एक कट्टर पार्टी ही रहेगी। स्वरा की इस आभासी कल्पना का क्या मतलब है?

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

इसका मतलब है कि एक उनके विचारों के आगे देश की करोड़ों जनता का मत बेकार है। इसका यही पर्याय है कि सिर्फ एक वो ही सेकुलर देश की नागरिक हैं और बाकी सब भाजपा जैसी ‘कट्टर’ पार्टी के अधीन हैं। उनके कहने का क्या मतलब है कि अगर भाजपा को जनता 543 सीट देकर लोकसभा पहुँचाती है तो जनता बेवकूफ़ है! क्या नागरिक अपने मताधिकारों का प्रयोग देश में कट्टरता फैलाने के लिहाज़ से करेंगे?

सोचिए, भाजपा का हिंदूवादी चेहरा देखकर स्वरा को देश में कट्टरता पसरने का डर सताता रहता है! तब तो कन्हैया के जीतने पर हिन्दुओं को अपने धर्म पर खतरा मंडराता दिखना चाहिए! अगर पार्टी और व्यक्ति को विचारधारा से आँका और परखा जाता है तो कन्हैया तो कम्युनिस्ट हैं, हम कैसे मान लें कि कल को देश के उच्च पद पर आसीन होने के बाद कन्हैया इस बात पर जोर नहीं देंगे कि सबको कम्युनिस्ट होना पड़ेगा? कैसे मान लें कि वो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे कथित तौर पर दोबारा नहीं लगाएँगे, कैसे यकीन करें कि ऐसा शख्स देश की अखंडता को बचाए रखेगा जो अपनी बात पर ही कायम न रह पाया हो…

स्वरा ने अपने इस ट्वीट से केवल यह बताया है कि वो न चाहते हुए भी जानने-समझने लगी हैं कि देश मोदी के नेतृत्व में भाजपा को ही सत्ता में चाहता है, बल्कि इस बात को भी बताया है कि वो देश की जनता और उनके फैसलों के बारे में क्या सोचती हैं। देश की जनता ने स्वरा का हमेशा साथ दिया है, उनके काम की प्रशंसा की है। उनके नारीवादी जज्बे को सराहाया है। उसके बावजूद बिना सोचे-समझे ऐसा कमेंट उनकी सोच और समझ पर दूसरों को उन पर उँगली उठाने का मौक़ा देता है। ट्वीट कीजिए! लेकिन सोच समझकर। आपको पढ़ने-सुनने वाले लोग बहुत हैं, उसका गलत इस्तेमाल करेंगे तो यूजर्स ट्रोल करेंगे ही।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अरविन्द केजरीवाल

लड़की पर पब्लिकली हस्तमैथुन कर फरार हुआ आदमी: मुफ्त मेट्रो से सुरक्षा नहीं मिलती

आप शायद 'सुरक्षा' के नाम पर महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करा सकते हैं, लेकिन आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि महिलाएँ वहाँ सुरक्षित हैं?
आसिया अंद्राबी

‘मैं हवाला के पैसे लेकर J&K में बवाल करवाती थी, उन्हीं पैसों से बेटे को 8 साल से मलेशिया में पढ़ा रही हूँ’

जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी सहित गिरफ्तार अलगाववादी नेताओं ने 2017 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। आसिया अंद्राबी ने कबूल किया कि वो विदेशी स्रोतों से फंड लेती थी और इसके एवज में...
हिन्दू धर्म और प्रतीकों का अपमान फैशन है क्योंकि कोई कुछ कहता नहीं

Netflix पर आई है ‘लैला’, निशाने पर हैं हिन्दू जिन्हें दिखाया गया है तालिबान की तरह

वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
दि प्रिंट और दीपक कल्लाल

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।
जय भीम-जय मीम

जय भीम जय मीम की कहानी 72 साल पुरानी… धोखा, विश्वासघात और पश्चाताप के सिवा कुछ भी नहीं

संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ यह जानना-समझना जरूरी है। जो दलित वोट-बैंक तब पाकिस्तान के हो गए थे, वो आज क्या और कैसे हैं, इस राजनीति को समझने की जरूरत है।
हार्ड कौर, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ

सस्ती लोकप्रियता के लिए ब्रिटिश गायिका ने मोहन भागवत को कहा ‘आतंकी’, CM योगी को बताया ‘Rape-Man’

"भारत में हुए सारे आतंकी हमलों के लिए मोहन भागवत ही ज़िम्मेदार हैं, चाहे वो 26/11 का मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा हमला। इतिहास में महात्मा बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणवादी जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाइयाँ लड़ी थीं। तुम एक राष्ट्रवादी नहीं हो, एक रेसिस्ट और हत्यारे हो।"
नितीश कुमार

अप्रिय नितीश कुमार, बच्चों का रक्त अपने चेहरे पर मल कर 103 दिन तक घूमिए

हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
औली-उत्तराखंड

200 करोड़ रुपया गुप्ता का, ब्याह गुप्ता के लौंडे का और आपको पड़ी है बदरंग बुग्याळ और पहाड़ों की!

दो सौ से दो हजार तक साल लगते हैं उस परत को बनने में जिस भूरी और बेहद उपजाऊ मिट्टी के ऊपर जन्म लेती है 10 से 12 इंच मोती मखमली घास यानी बुग्याळ! और मात्र 200 करोड़ रुपए लगते हैं इन सभी तथ्यों को नकारकर अपने उपभोक्तावाद के आगे नतमस्तक होकर पूँजीपतियों के समक्ष समर्पण करने में।
पाकिस्तान

ईश-निंदा में फ़ँसे Pak हिन्दू डॉक्टर लटकाए जा सकते हैं सूली पर… लेकिन ‘इनटॉलेरेंस’ भारत में है

जिन्हें अपने देश भारत के कानून इतने दमनकारी लगते हैं कि लैला जैसी डिस्टोपिया बनाकर वह मुसलमानों की प्रताड़ना दिखाना चाहते हैं, उन्हें केवल एक हफ़्ते पाकिस्तान में बिता कर आना चाहिए। आपके हिन्दूफ़ोबिक यूटोपिया जितना तो अच्छा नहीं है, लेकिन वैसे हिंदुस्तान का लोकतंत्र काफी अच्छा है...
पत्रकारिता के नाम पर संवेदनहीनता और बेहूदगी आम हो चुकी है

जब रिपोर्टर मरे बच्चे की माँ से भी ज़्यादा परेशान दिखने लगें…

नर्स एक बीमार बच्चे के बेड के पास खड़ी होकर कुछ निर्देश दे रही है और हमारे पत्रकार माइक लेकर पिले पड़े हैं! ये इम्पैक्ट किसके लिए क्रिएट हो रहा है? क्या ये मनोरंजन है कुछ लोगों के लिए जिनके लिए आप पैकेज तैयार करते हैं? फिर आपने क्या योगदान दिया इस मुद्दे को लेकर बतौर पत्रकार?

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

50,880फैंसलाइक करें
8,839फॉलोवर्सफॉलो करें
69,851सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: