X सिक्योरिटी वाली शेहला रशीद कश्मीर पर फैला रही प्रोपगेंडा, सोशल मीडिया में लगी लताड़

आदित्य राज कौल ने प्रधानमंत्री ऑफिस और गृह मंत्रालय से अपील करते हुए लिखा कि शेहला रशीद की सुरक्षा वापस ली जाए। साथ ही उन्होंने शेहला पर पत्रकारों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।

पत्रकारों पर सरकार से सुविधाएँ लेने का आरोप लगाना शेहला रशीद उलटा पड़ गया। शेहला ने ट्विटर पर लिखा कि जो पत्रकार जम्मू-कश्मीर में सबकुछ सामान्य होने की बात कह रहे हैं, वो प्रोपगेंडा फैला रहे हैं। शेहला के अनुसार, ऐसे पत्रकारों को कश्मीर में घूमने के लिए बुलेट-प्रूफ गाड़ी, सेना के हेलीकॉप्टर और सरकार द्वारा इंटरनेट सहित कई सुविधाएँ दी जा रही हैं। शेहला ने लिखा कि यह सब इसीलिए किया जा रहा है ताकि वे जम्मू-कश्मीर में स्थिति को सामान्य बता सकें।

इसके बाद शेहला ने राज्य के लोगों का सरकार द्वारा दमन करने की पाकिस्तान की बात को दुहराया। शेहला की इस ट्वीट के बाद आंतरिक सुरक्षा मामलों के जानकार आदित्य राज कौल ने कुछ ऐसा खुलासा किया, जो शायद बहुत से लोगों को न पता हो। कौल ने शेहला रशीद को याद दिलाते हुए लिखा, “तुम्हें जम्मू कश्मीर पुलिस से X-2 सिक्योरिटी सुरक्षा हासिल है और तुम दो PSO के साथ घूमती हो।

आदित्य राज कौल ने प्रधानमंत्री ऑफिस और गृह मंत्रालय से अपील करते हुए लिखा कि शेहला रशीद की सुरक्षा वापस ली जाए। साथ ही उन्होंने शेहला पर पत्रकारों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। बता दें कि कई ऐसे लोग हैं जिन्हें जम्मू-कश्मीर में शांति अखर रही है और वे लगातार इस प्रयास में लगे हैं कि वहाँ की हर छोटी-बड़ी घटना को अलग एंगल देकर पेश किया जाए ताकि लोगों को लगे कि कश्मीर उबल रहा है। हालाँकि, गृह मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद कश्मीर में एक भी बुलेट फायर नहीं की गई है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

एक ट्विटर यूजर ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि शेहला रशीद जैसे लोगों को सुरक्षा कवर देना जनता के टैक्स का ग़लत इस्तेमाल है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि अब जब जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होगी, क्या शेहला रशीद अपनी सुरक्षा वापस कर देगी? जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद आजकल आईएएस से नेता बने शाह फैसल की सहयोगी हैं। फैसल बौखलाहट में बदला लेने की धमकी दे रहे हैं।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई (बार एन्ड बेच से साभार)
"पारदर्शिता से न्यायिक स्वतंत्रता कमज़ोर नहीं होती। न्यायिक स्वतंत्रता जवाबदेही के साथ ही चलती है। यह जनहित में है कि बातें बाहर आएँ।"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

112,393फैंसलाइक करें
22,298फॉलोवर्सफॉलो करें
117,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: