Homeराजनीतिपटना: समान काम के लिए समान वेतन मॉंग रहे शिक्षकों पर बरसाई लाठियाँ

पटना: समान काम के लिए समान वेतन मॉंग रहे शिक्षकों पर बरसाई लाठियाँ

पहली बार शिक्षकों के 18 संगठन एक साथ सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट हुए हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद शिक्षकों ने ट्रैफिक जाम कर दिया।

बिहार में संविदा शिक्षकों का आंदोलन जारी है। समान काम के लिए समान वेतन माँग रहे शिक्षकों पर गुरुवार को राजधानी पटना में पुलिस ने लाठियाँ बरसाई।

विधानसभा के पास प्रदर्शन कर रहे संविदा शिक्षकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने न सिर्फ़ आँसू गैस के गोले छोड़े, बल्कि वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद शिक्षकों पर लाठियाँ भाजी गईं। उनकी जम कर पिटाई की गई।

पुलिस की कार्रवाई में कई शिक्षक घायल हुए। उग्र शिक्षकों ने ट्रैफिक जाम किया। ऐसा पहली बार हैं, जब शिक्षकों के 18 संगठन एक साथ सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट हुए हैं। शिक्षकों ने गर्दनीबाग़ क्षेत्र का मेन गेट तोड़ डाला। बिहार में नियमित शिक्षकों को संविदा पर बहाल शिक्षकों से ज्यादा वेतन मिलता है। संविदा पर बहाल शिक्षकों की माँग है कि उन्हें भी उतना ही वेतन मिले, जितना नियमित शिक्षकों को दिया जाता है।

‘समान काम-समान वेतन’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन शिक्षकों के ख़िलाफ़ ही फ़ैसला सुनाया था। बिहार के सभी जिलों से शिक्षक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पटना पहुँचे थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -