Sunday, October 17, 2021
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शादी में पैसा, फ्री कार, मस्जिद-दरगाहों का विकास: तेलंगाना में ‘अल्पसंख्यकों’ पर 6 साल में ₹5600 करोड़ खर्च

आर्थिक सहायता से लेकर छात्रवृत्ति तक अल्पसंख्यकों को राज्य सरकार की उदारता का लाभ मिला है, लेकिन हिंदू को समान लाभ नहीं दिया जाता। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि केवल हिंदू मंदिर और संस्थान राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य का अल्पसंख्यक संस्थानों और धार्मिक स्थानों पर कोई नियंत्रण नहीं है।

तेलंगाना में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के लिए सरकारी खजाने का नायाब उपयोग सामने आया है। तेलंगाना सरकार ने पिछले 6 वर्षों में राज्य में अल्पसंख्यक केंद्रित योजनाओं पर 5,639.44 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

तेलंगाना टुडे में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चाहे वह शिक्षा हो या छात्रवृत्ति, विवाह के लिए वित्तीय सहायता हो या मजहबी स्थलों का विकास, रोजगार हो या सब्सिडी, तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की सरकार राज्य के अल्पसंख्यकों को लाभ पहुँचाने में काफी उदार रही है।

तेलंगाना सरकार धार्मिक पहचान के आधार पर लाभ पहुँचा रही है। अल्पसंख्यक समुदायों जैसे कि मुस्लिम, सिख, ईसाई से संबंधित निवासी राज्य के कल्याणकारी लाभों का फायदा उठा रहे हैं, जबकि राज्य के बहुसंख्यक हिंदुओं को उनके धर्म के कारण इन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जाता है, उन्हें अयोग्य माना गया है।

अल्पसंख्यकों को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई योजना में शादी मुबारक, अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय और जूनियर कॉलेज, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए छात्रवृत्ति, अल्पसंख्यकों के लिए विदेशी छात्रवृत्ति, यूपीएससी परीक्षाओं के लिए कोचिंग, इमामों और मुअज्जिनों के लिए मानदेय, तेलंगाना राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम (TSMFC) के माध्यम से वित्तीय सहायता योजनाएँ शामिल हैं।

इसके अलावा, राज्य सरकार अल्पसंख्यकों को उनके धार्मिक त्योहारों पर उपहार पैकेज भी वितरित करती है। अल्पसंख्यकों के लिए मजहबी महत्व के स्थलों के विकास के लिए विशेष धनराशि निर्धारित की गई है। इतना ही नहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों की सहायता के लिए तेलंगाना स्टेट माइनॉरिटी स्टडी सर्कल भी स्थापित किया गया है।

राज्य सरकार मुस्लिम अल्पसंख्यक के प्रति काफी अधिक उदार है। उर्दू को इस आधार पर दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में घोषित किया कि राज्य की आबादी का 12.69 प्रतिशत उर्दू भाषी हैं। सरकार ने अनुवाद कार्यों में मदद के लिए कई विभागों में उर्दू अधिकारियों के रूप में 66 उर्दू अनुवादकों को भी नियुक्त किया। 2017 में केसीआर सरकार ने सरकारी नौकरियों में मजहब विशेष के लिए कोटा 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया।

शादी मुबारक

इसे 2014 में पहली बार लॉन्च किया गया था, तब तेलंगाना सरकार ने लगभग 1.7 लाख अल्पसंख्यक परिवारों को 1,241.47 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की थी। इस योजना के माध्यम से प्रत्येक परिवार को 1,00,116 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जब लॉन्च किया गया था, तो प्रारंभिक सहायता 51,000 रुपए आँकी गई थी, लेकिन 6 साल में यह राशि लगभग दोगुनी हो गई है।

शिक्षा

पिछले 6 वर्षों में, अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 8,17,242 छात्रों ने तेलंगाना सरकार द्वारा विस्तारित लाभों का लाभ उठाया है। स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पर लगभग 1241.47 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

अल्पसंख्यक छात्रों के लिए इसी तरह की योजना में, लगभग 6,55,218 छात्रों की ट्यूशन फीस लौटा दी। केसीआर सरकार ने उन अल्पसंख्यक छात्रों की भी सहायता की है, जो भारत से बाहर जाकर अपनी उच्च पढ़ाई करना चाहते हैं। विदेशी विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक प्रत्येक छात्र को सरकारी खजाने से 20 लाख रुपए दिए जाते हैं। सरकार ने इस पर अब तक 260.98 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और लगभग 1,937 छात्रों को इसका लाभ हुआ है।

मजहबी स्थलों का विकास

मक्का मस्जिद के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 8.48 करोड़ रुपए दिए गए। सैंकड़ों साल पुरानी इस्लामिक यूनिवर्सिटी, जामिया निजामिया में एक सभागार का निर्माण तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड और राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 14.65 करोड़ रुपए की लागत से किया।

दरगाह जहाजीर पीर में विकासात्मक कार्य के लिए राज्य सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपए मंजूर किए गए। इसी तरह, दरगाह हज़रत बाबा शरफ़ुद्दीन पर 9.60 करोड़ रुपए का खर्च पहाड़ी शरीफ में एक कंक्रीट सीमेंट रैंप बनाने के लिए किया गया था। सरकार ने ईदी बाज़ार में दरगाह हज़रत सैयद ख्वाजा हसन बरहाना शाह शाहिद को 20 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।

तेलंगाना वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, मोहम्मद सलीम के अनुसार, 20 करोड़ रुपए की लागत से नामपल्ली अनीसुल घुरबा अनाथालय में एक बहुमंजिला इमारत का निर्माण चल रहा है। हैदराबाद में 40 करोड़ रुपए की लागत से एक इस्लामिक और सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर भी बनाया जा रहा है, जबकि अजमेर में मोहिउद्दीन चिश्ती की दरगाह पर रुबैत के निर्माण के लिए पाँच करोड़ रुपए आवंटित किए गए।

आर्थिक सहायता योजना

तेलंगाना सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यकों के ‘उत्थान’ के लिए आर्थिक सहायता भी दी है। राज्य ने ड्राइवर सशक्तिकरण कार्यक्रम, तेलंगाना राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम (TSMFC) के तहत 24.04 करोड़ रुपए की लागत से 542 मारुति स्विफ्ट डिजायर कारों का वितरण किया है। 

इसके अलावा ‘Own Your Autorickshaw scheme’ स्कीम के तहत अल्पसंख्यक लाभार्थियों को 12.76 करोड़ रुपए की लागत पर 1,744 ऑटो-रिक्शा वितरित किए गए। राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम ने 8.03 करोड़ रुपए की लागत से 10,072 सिलाई मशीनें भी वितरित की हैं। निगम द्वारा 20,176 व्यक्तियों को ऋण दिया गया था और लाभार्थियों को 172.77 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर भी की गई थी।

अल्पसंख्यकों को दिए गए कल्याणकारी लाभों से तेलंगाना के बहुसंख्यक हिंदू वंचित

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि यही लाभ तेलंगाना के हिंदू बहुसंख्यकों को नहीं दिया गया। आर्थिक सहायता से लेकर छात्रवृत्ति तक अल्पसंख्यकों को राज्य सरकार की उदारता का लाभ मिला है, लेकिन हिंदू को समान लाभ नहीं दिया जाता। हालाँकि भारत का संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा नहीं देता है। इसके बावजूद तेलंगाना सहित कई राज्य सरकारें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धर्म के आधार पर देते हैं।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि केवल हिंदू मंदिर और संस्थान राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य का अल्पसंख्यक संस्थानों और धार्मिक स्थानों पर कोई नियंत्रण नहीं है। अल्पसंख्यकों को खुश करने के उद्देश्य से अपनी विशेष योजनाओं और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए हिंदू धार्मिक स्थलों से प्राप्त धन का उपयोग भी अक्सर राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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