Monday, May 20, 2024
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भक्तों को मंदिर में जाने से रोका, केरल पुलिस जूते पहन कर अंदर घुसी: ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव पर वामपंथी सरकार ने लगाए थे कई तरह के प्रतिबंध, अब दबाव में CM ने कही जाँच की बात

वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से केरल की वामपंथी सरकार ने मंदिर के अंदर पुलिस को भेजा और आम श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ करने से रोका।

केरल के त्रिशूर शहर में प्रसिद्ध वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव में शुक्रवार-शनिवार (19-20 अप्रैल 2024) की रात हजारों लोग शामिल हुए, लेकिन केरल की वामपंथी सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आई और उसने मंदिर परिसर में पुलिस भेज दिया। इस मंदिर में पुलिस को भी जूता पहनने की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद पुलिस ने बैरिकेटिंग कर न सिर्फ आम भक्तों को मंदिर में जाने से रोका, बल्कि जूता पहने पुलिस भी मंदिर परिसर में मौजूद रही, जिसकी वजह से मंदिर प्रशासन और आम लोगों ने जमकर हंगामा किया। इस मामले में वामपंथी मुख्यमंत्री पी विजयन ने जाँच की बात कही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से केरल की वामपंथी सरकार ने मंदिर के अंदर पुलिस को भेजा और आम श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ करने से रोका।

रमित नाम के एक्स यूजर ने केरल पुलिस की बदतमीजी वाला वीडियो पोस्ट किया और लिखा, “त्रिसूर पूरम त्योहार महाने से पिनराई विजयन की पुलिस रोक रही है। ये वो वजह है, जिसे हिंदुओं को शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को वोटिंग के दौरान याद रखने की जरूरत है।”

इस मामले में लोगों के बढ़ते दबाव के बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का बयान सामने आया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वो इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच का आदेश दे रहे हैं। सीएम पी विजयन ने कहा, “इसकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए कि पूरम वाले दिन क्या हुआ था। देवास्वोम अधिकारियों द्वारा भेजी गई एक शिकायत मौजूद है…पुलिस महानिदेशक को घटनाओं की जाँच करने और एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।”

पुलिस और सरकार भिड़ी

इस मामले में चुनाव के दौरान सरकार की छवि खराब करने वाली पुलिसिया कार्रवाई से मंत्री के राजन समेत वामपंथी नेता नाराज हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान मंत्री के. राजन ने गहरी नाराजगी जताई, जिसके जवाब में कलेक्टर ने भी सख्त भाषा का इस्तेमाल किया। चूँकि इस दौरान मीडिया कर्मियों से भी बदतमीजी की घटनाएँ हुए थी, ऐसे में सरकार को डर है कि कहीं ये मामला उस पर भारी न पड़ जाए।

बता दें कि वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव के दौरान आतिशबाजी पर रोक और पुलिस के मंदिर परिसर में घुसने से लोग नाराज हो गए। यही नहीं, तिरुवंबडी देवास्वोम के सदस्यों की पुलिस के साथ बहस हो गई। इसके बाद देवास्वोम अधिकारी ने पूरम कार्यवाही बंद कर दी। तिरुवंबडी मंदिर में केवल एक हाथी की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाज सादे तरीके से आयोजित की गई। जो आतिशबाजी सुबह 3 बजे निर्धारित थी, वह सुबह 7 बजे हुई। यही नहीं, पुलिस पर हिंदुओं के साथ अभद्रता करने का आरोप भी लगा है।

दरअसल, मंदिर प्रशासन एवं आयोजन समिति के साथ पुलिस का किसी तरह का कोई समन्वय नहीं था। जारी किए गए पासों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी। उत्सव के दौरान पुलिस के भारी हस्तक्षेप के कारण थिरिवाम्बडी मंदिर में सुबह की पूजा के दौरान हंगामा मच गया। हाथी जुलूस के दौरान भी तनाव बढ़ गया। परमेक्कावु मंदिर में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आईं। पुलिस ने पूरम परिसर में अचानक रस्सी के बैरिकेड लगा दिए, जिससे पूरम आयोजक नाराज हो गए।

बता दें कि त्रिशूर पूरम उत्सव का सबसे रंगीन कार्यक्रम कुदामट्टम है। यह अनुष्ठान में 15 हाथियों की दो पंक्तियाँ आमने-सामने खड़ी रहती हैं। इस दौरान एक के बाद एक नवीन रूप से डिजाइन किए गए छतरियों को प्रदर्शित किया जाता है। यह त्योहार तिरुवंबडी और परमेक्कावु मंदिरों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिद्वंद्विता और सौहार्द्र का प्रतीक है।

इस सालाना उत्सव को आमतौर पर राज्य के सभी मंदिर त्योहारों की जननी के रूप में जाना जाता है। इसमें 30 सजे-धजे हाथियों को परामेक्कावु और तिरुवम्बडी मंदिर में सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार परेड के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े किया जाता है। परेड करने वाले हाथियों को अधिकारियों की ओर से फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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