Saturday, May 25, 2024
Homeराजनीतिअसम में उग्रवादी बना कॉन्ग्रेस का युवा नेता: सोशल मीडिया पर ULFA-I से जुड़ने...

असम में उग्रवादी बना कॉन्ग्रेस का युवा नेता: सोशल मीडिया पर ULFA-I से जुड़ने का किया ऐलान, कहा- सशस्त्र विद्रोह का कोई विकल्प नहीं

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने ULFA-I में नए सदस्यों की भर्ती की खबरों पर चिंता जताई थी।

असम (Assam) में एक कॉन्ग्रेस नेता के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (स्वतंत्र) (ULFA-I) में शामिल होने की खबर सामने आई है। इस कॉन्ग्रेस नेता का नाम जनार्दन गोगोई है। ULFA-I में शामिल होने की पुष्टि खुद जनार्दन गोगोई ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए की है। वह असम के तिनसुकिया के सादिया का रहने वाला है और जिला युवा कॉन्ग्रेस इकाई का उपाध्यक्ष है।

जानकारी की मुताबिक ULFA-I में शामिल होने के लिए गोगोई ने घर-परिवार छोड़ दिया है। उसने फेसबुक पर पत्नी के नाम एक पत्र लिखा है। इसमें ULFA-I में शामिल होने के कारणों के बारे में बताया है। उसने लिखा है, “कुछ लोग असमिया समाज के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं। मैंने महसूस किया है कि कुछ राजनीतिक दल और तथाकथित क्षेत्रीय संगठन असमिया समाज के नाम पर व्यापार कर रहे हैं। आज, असमिया लोग अपनी मातृभूमि में असहाय हो गए हैं। मैं असमिया समाज को मिटाने की कोशिशों का महज एक दर्शक नहीं बन सकता। यह सरकार जनता द्वारा उठाए गए विरोध को लोकतांत्रिक तरीके से सुनने में विफल रही है। असमिया समाज के हितों की रक्षा के लिए सशस्त्र विद्रोह का कोई विकल्प नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने (ULFA-I) में नए सदस्यों की भर्ती की खबरों पर चिंता जताई थी। सरमा ने कहा था कि सरकार उल्फा (आई) से जुड़े मामलों समेत सभी विवादों का राजनीतिक समाधान निकालने के गंभीर प्रयास कर रही है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि 47 ‘लड़के और लड़कियाँ’ ULFA(I) में शामिल हो गए हैं, लेकिन कई वरिष्ठ लोगों ने संगठन छोड़ दिया है।

बता दें कि यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) असम का एक उग्रवादी संगठन है। इसकी स्थापना 1979 में हुई थी। परेश बरुआ इसके संस्थापक थे। 1990 में भारत सरकार ने इसे बैन कर दिया था। बाद में नेताओं के बीच मतभेद से उल्फा का विभाजन हो गया। ULFA(I) का नेतृत्व फिलहाल अभिजीत बर्मन के हाथ में है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ईवीएम पर नहीं लगा था BJP का टैग, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने झूठ फैलाया: चुनाव आयोग ने खोली पोल, बताया- क्यों लिए जाते हैं मशीन...

भारतीय निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के आरोपों का जवाब देते हुए झूठे दावे की पोल खोली और बताया कि ईवीएम पर कोई भाजपा का टैग नहीं हैं।

CM केजरीवाल के घर कहाँ हुआ क्या-क्या… दिल्ली पुलिस ने सब सीन री-क्रिएट करवाए, विभव कुमार ने बचने को डाली जमानत याचिका

दिल्ली पुलिस विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास भी लेकर पहुँची, जहाँ स्वाति मालीवाल के साथ हुई घटना का पूरा सीन रिक्रिएट किया गया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -