AMU छात्र मोहम्मद तालिब की जमानत याचिका ख़ारिज, छात्रों ने किया 3 घंटे तक विरोध प्रदर्शन

मोहम्मद तालिब B.A के द्वितीय वर्ष का छात्र है जिसे रविवार (17 फ़रवरी 2019) की रात को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। छात्र संघ के सदस्य तालिब की गिरफ़्तारी के बाद विरोध में उतर आए थे और पुलिस स्टेशन को घेर लिया था।

निचली अदालत ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्र मोहम्मद तालिब की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई है। बता दें कि मोहम्मद तालिब पर 12 फरवरी को कैंपस में हिंसा के दौरान बर्बरता और शत्रुता को बढ़ावा देने के आरोप थे।

इस याचिका पर अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने सुनवाई की। ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद, बड़ी संख्या में छात्र बाब-ए-सैयद गेट पर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया जो लगभग तीन घंटे तक जारी रहा। अभियोजन अधिकारी इंद्रजीत पाल जो तालिब की जमानत याचिका का विरोध कर रहे थे, ने कहा, “मैंने उसकी जमानत याचिका का विरोध किया, क्योंकि अपराध की प्रकृति गंभीर थी।”

बता दें कि तालिब, B.A के द्वितीय वर्ष का छात्र है जिसे रविवार (17 फ़रवरी 2019) की रात को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। छात्र संघ के सदस्य तालिब की गिरफ़्तारी के बाद विरोध में उतर आए थे और पुलिस स्टेशन को घेर लिया था। हालाँकि, पुलिस द्वारा उसकी गिरफ़्तारी के सबूत दिखाए जाने के बाद वे लौट गए थे। छात्र संघ के उपाध्यक्ष हमज़ा सूफ़ियान ने कहा कि वे ज़िला प्रशासन के अधिकारियों से मिलेंगे जिन्होंने तालिब की जल्द रिहाई का आश्वासन दिया था।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

AMU के कुछ छात्रों ने कथित रूप से पत्रकार नलिनी शर्मा सहित रिपब्लिक टीवी क्रू को परेशान किया था जो परिसर से लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं। पत्रकार ने आरोप लगाया था कि एएमयू के छात्रों ने उनके उपकरण भी छीन लिए थे।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

ये पढ़ना का भूलें

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

राजदीप सरदेसाई

राजदीप भी पलट गए? विपक्ष के EVM दावे को फ़रेब कहा… एट टू राजदीप?

राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
बरखा दत्त

बरखा दत्त का दु:ख : ‘मेनस्ट्रीम मीडिया अब चुनावों को प्रभावित नहीं कर पाएगा’

बरखा ने कॉन्ग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अगर एक्जिट पोल के आँकड़ें सही साबित हुए, तो यह कॉन्ग्रेस पार्टी के 'अस्तित्व पर संकट' साबित हो सकता है।
उत्तर प्रदेश, ईवीएम

‘चौकीदार’ बने सपा-बसपा के कार्यकर्ता, टेंट लगा कर और दूरबीन लेकर कर रहे हैं रतजगा

इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी और दूरबीन का भी प्रयोग किया जा रहा है।
लिबटार्ड्स

हिंदुओं ने दिया मोदी को वोट, हिंसा और नफरत ही अब भारत का भविष्य: स्वरा भास्कर

'मोदी ग़ुफा' को मिलने वाली है रिकॉर्ड बुकिंग, लिबरल हिमालय की चोटियों से साझा करेंगे 'दुखी मन की बात'!
मौत से जंग

‘माँ’ की लाश, बगल में 1 साल की बच्ची और 4 दिन की ‘जंग’: चमत्कार है गुड़िया का बचना

4 दिनों का भूख-प्यास जब हावी हुआ तो गुड़िया (1 साल की बच्ची) माँ की लाश का मोह छोड़ते हुए, रेंगते हुए, खेत से बाहर एक मंदिर के पास जा पहुँची। यहाँ कुछ भक्तों की नज़र इस पर गई। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी और गुड़िया को अस्पताल तक पहुँचाया।
ओपी राजभर

इतना सीधा नहीं है ओपी राजभर को हटाने के पीछे का गणित, समझें शाह के व्यूह की तिलिस्मी संरचना

ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
क्या अभी भी 'अर्बन नक्सली' नहीं है आप?

चुनाव परिणामों को लेकर AAP नेता ने दी दंगों, गृह युद्ध की धमकी

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के अनुमान के बाद से विपक्षी नेताओं में हिंसा की धमकी की बाढ़ सी आ गई है।

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
अशोक लवासा

अशोक लवासा: कॉन्ग्रेस घोटालों से पुराने सम्बन्ध, चुनाव आयोग के कमिश्नर हैं

ऑपइंडिया के पास शुंगलू कमिटी का वह रिपोर्ट है जिसमें अशोक लवासा की बेटी और बेटे के अनुचित लाभ उठाने की बात कही गई है। शुंगलू कमिटी ने ये साफ बताया है कि सिलेक्शन कमिटी ने अन्वी लवासा के प्रोजेक्ट ऑफिसर (PO) के रूप में चयन में उन्हें उनके पॉवरफुल संबंधों की वजह से फेवर किया गया।
गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार

बेगूसराय में BJP और CPI कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प, हुई जमके पत्थरबाजी

चुनावी माहौल में इस तरह की खबरें अभी तक केवल पश्चिम बंगाल से सुनने-देखने को मिलीं थी, लेकिन रुझान आने के बाद अब ये दृश्य सीपीआई के कार्यालय के बाहर भी देखने को मिल रहा है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

41,668फैंसलाइक करें
8,011फॉलोवर्सफॉलो करें
64,261सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: