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FATF से पाकिस्तान ने मांगी 200 दिनों की मोहलत, नहीं सुधरा हो जाएगा ब्लैक लिस्ट

अगर पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय बैंक पाकिस्तान से बाहर चले जाएँगे और राजस्व में जो घाटा हो रहा है वो और भी अधिक बढ़ जाएगा।

पुलवामा हमले के बाद भारत समेत विश्व के अधिकांश राष्ट्रों की नज़र पाकिस्तान पर लगातार बनी हुई है। भारत ने कई कड़े फैसलों के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की घेराबंदी करनी भी शुरू कर दी है। इसी दिशा में अब फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने भी स्पष्ट किया है कि अगर साल 2019 के अक्टूबर तक पाकिस्तान ने आतंकवाद को फंडिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। यह फैसला शुक्रवार (फरवरी 22, 2019) को पेरिस में 17 से 22 फरवरी तक चली बैठक के बाद लिया गया है। इस बैठक में 38 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बता दें कि FATF की सूची में पाकिस्तान पहले से ही ग्रे लिस्ट में शामिल है और उसके पास अब अक्टूबर तक का समय है। अगर पाकिस्तान अक्टूबर तक कोई कदम उठाकर सुधार नहीं करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। फिलहाल उत्तर कोरिया और ईरान ब्लैक लिस्ट में शामिल हैं। पाकिस्तान को इससे बचने के लिए अभी 200 दिन का समय दिया गया है। पाकिस्तान को चेतावनी दी गई है कि आतंकी फंडिंग रोकने के एक्शन प्लान को वह मई तक पूरा कर ले, FATF जून और अक्टूबर में फिर से इसकी समीक्षा करेगा।

FATF की बैठक

अगर पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। ब्लैक लिस्ट होते ही अंतर्राष्ट्रीय बैंक पाकिस्तान से बाहर चले जाएँगे और पाकिस्तान के राजस्व में जो घाटा हो रहा है वो और भी अधिक बढ़ जाएगा।

पुलवामा में हुए भयावह हमले के बाद पाकिस्तान द्वारा आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग करने की बात और भी अधिक पुष्ट हुई थी। भारत द्वारा यह अपील की गई थी कि इस मामले में पाकिस्तान पर खासतौर से नज़र रखा जाए और सुनिश्चित हो कि पाकिस्तान इन आंतकियों को दी जाने वाली फंडिंग रोके।

इस माँग को उठाते समय भारत ने पुलवामा का हवाला दिया था जिसकी जिम्मेदारी स्वयं पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद संगठन ने ली। खबरें हैं कि भारत ने इस मामले में सबूत भी पेश किए कि कैसे पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को रोकने असफल रहा है।

FATF के बारे में आपको बता दें कि यह एक इंटर गवर्नमेंटल एजेंसी है। 1989 में इसका गठन किया गया था। 2001 में इस एजेंसी की शक्ति को बढ़ाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के लिए होने वाली फंडिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के अधिकार भी दिए गए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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