रोज़गार कहाँ है? पूछने वाले यह ख़बर ज़रूर पढ़ें…

अधिकतर भर्तियाँ रेल मंत्रालय, पुलिस बलों, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर विभागों द्वारा की गई थी। केंद्र सरकार के प्रस्तावित बजट में इस बात का उल्लेख है कि विभागीय स्तर पर किस-किस क्षेत्र में कितनी नौकरियों का इज़ाफ़ा किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बन जाने के बाद से देश में बेरोज़गारी को लेकर आए दिन माहौल गरमाया रहता है। ऐसे में सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में 3.79 लाख से अधिक नौकरियाँ दी गईं।

सरकार ने कहा कि साल 2017 से 2018 के बीच में केंद्रीय सरकार ने 2,51,279 नौकरियाँ निकाली थी। 1 फरवरी को कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत किए गए अंतरिम बजट के दस्तावेजों के विश्लेषण से अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च 01, 2019 तक यह 3,79,544 अंक बढ़कर 36,15,770 के आँकड़े तक पहुँच जाएगा।

सरकार द्वारा पेश किया गया ये रिकॉर्ड जानना इसलिए भी बेहद ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि कॉन्ग्रेस लगातार बीजेपी को बेरोज़गारी के मुद्दे पर घेरती रही है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

बृहस्पतिवार (7 फ़रवरी 2019) को संसद में बोलते हुए पीएम मोदी ने बताया कि प्रोविडेंट फंड, नेश्नल पेंशन योजना, आय कर भरने वालों में और वाहनों की ख़रीद से निकले आँकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि संगठित और गैर-संगठित संस्थानों को मिलाकर करोड़ों नौकरियों का सृजन किया गया है।

बता दें कि अधिकतर भर्तियाँ रेल मंत्रालय, पुलिस बलों, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर विभागों द्वारा की गई थी। केंद्र सरकार के प्रस्तावित बजट में इस बात का उल्लेख है कि विभागीय स्तर पर किस-किस क्षेत्र में कितनी नौकरियों का इज़ाफ़ा किया गया।

इसमें बताया गया है कि भारतीय रेलवे में 1 मार्च 2019 कर 98,999 नौकरियाँ देने के लिए तैयार है। इसके अलावा पुलिस विभाग में 1 मार्च 2019 तक 79,353 अतिरिक्त नौकरियाँ निकाली जाएँगी। इसी तरह से प्रत्यक्ष कर विभाग में नौकरियों का आँकड़ा 1 मार्च 2019 तक 80,143 तक पहुँचेगा। सरकार ने बताया कि अप्रत्यक्ष कर विभाग में मार्च 2017 में 53,394 लोग कार्यरत थे जबकि मार्च 2018 तक ये आँकड़ा 92, 842 तक पहुँचा।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय में 1 मार्च तक 2,363 कर्मचारी होंगे, जबकि मार्च 2017 तक में 1,174 कर्मचारी थे। इसी तरह से डाक विभाग में 1 मार्च 2019 तक 4,21,068 कर्मचारी होंगे। इसके साथ ही ऐसा अनुमान है कि अगले माह तक विदेश मंत्रालय में भी 11,877 कर्मचारी काम कर रहे होंगे। जबकि साल 2017 तक इसमें सिर्फ़ 10,044 कर्मचारी ही कार्य कर रहे थे।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

पति ने TIK-TOK चलाने से किया मना, पत्नी ने की आत्महत्या, रिकॉर्ड किया मौत का वीडियो

24 वर्षीय अनीता की शादी 29 साल के पलानीवेल के साथ हुई थी। उनके चार साल की एक बेटी और दो साल का एक बेटा भी है।
दीदी, सुरक्षा दो या इस्तीफा

सईद की मौत पर 200 दंगाईयों को बुलाकर डॉक्टरों पर हमला करने वालों को ममता क्यों बचा रही है?

पथराव शुरू हुआ, डॉक्टरों पर जानलेवा हमले हुए तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? क्यों डॉक्टरों की जान बचाने के लिए दंगाईयों पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई? जवाब हम सब को पता है। क्योंकि हमलावर मुसलमान थे- अगर उन्हें कुछ हो जाता तो ममता के वोट बैंक को खतरा था।
कमांडो निराला (फाइल फोटो)

देश के लिए बलिदान हुए थे कॉर्पोरल निराला, गरुड़ कमांडो ने पैसे जुटाकर कराई बहन की शादी

कमांडो निराला की बहन की शादी के लिए गरुड़ कमांडो यूनिट ने आपस में चंदा कर ₹5 लाख इकठ्ठा किए थे। यही नहीं, शादी की रस्म पूरी करने के लिए कमांडोज़ ने शादी में शिरकत भी की।
दि प्रिंट और दीपक कल्लाल

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।

NDTV के प्रणय रॉय और राधिका रॉय को झटका, SEBI ने 2 साल के लिए किया बैन

NDTV पिछले कई सालों से वित्तीय अनियमितताओं और टैक्स फ्रॉड के कारण जाँच एजेंसियों के रडार पर थी। सेबी ने सिक्योरिटी एक्सचेंज मार्केट में लेन-देन और NDTV मैनेजमेंट में किसी भी पोस्ट से 2 साल के लिए बाहर कर दिया है।
सावरकर (साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

सावरकर ‘वीर’ तब तक नहीं होंगे जब तक हिन्दू अपनी कहानियाँ खुद सुनाना नहीं सीखते

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

सरकारी डॉक्टर की जान बनाम मुस्लिम वोटबैंक को निहारती निर्मम ममता जो दंगे पीती, खाती और सोती है

ये भीड़ इतनी जल्दी कैसे आती है, कहाँ हमला करती है और किधर गायब हो जाती है? क्या पुलिस ने नहीं देखा इन्हें? क्या हॉस्पिटल में सुरक्षा के लिए पुलिस आदि नहीं होती या फिर इस पहचानहीन भीड़ का सामूहिक चेहरा ममता की पुलिस ने पहचान लिया और उन्हें वो करने दिया जो वो कर गए?
ममता बनर्जी

घमंडी, फासीवादी, सांप्रदायिक, स्वेच्छाचारी, हिंसक, असंवैधानिक, तानाशाह, भ्रष्ट, अलगाववादी: यही हैं ममता

यह इकोसिस्टम कुतर्क में उस्ताद है। बंगाल की हर हिंसा में तृणमूल के साथ बराबर का भागीदार भाजपा को बना देता है। सांप्रदायिकता में भी यही रवैया अपनाता है।
अमित शाह, जदयू प्रवक्ता

अमित शाह और BSF को कोसने के बाद JDU प्रवक्ता ने खुद दिया इस्तीफ़ा

11 तारीख़ को आलोक ने ट्विटर पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने बांग्लादेशी शरणार्थियों के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा था। साथ ही एक ट्वीट में उन्होंने बीएसएफ अधिकारियों पर भी निशाना साधा था।
अक्षय पात्र, पुरस्कार

Akshay-Patra को मिला ग्लोबल अवॉर्ड, द हिंदू खोजता रह गया लहसुन-प्याज

इस पुरस्कार को देने के दौरान निर्णायक पैनल के प्रमुख शेफ़ सामीन नोसरात ने कहा कि स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराना अद्भुत और शानदार कार्य है। बच्चों को भोजन करवाना सबसे महत्तवपूर्ण हैं। इस प्रकार के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

50,115फैंसलाइक करें
8,751फॉलोवर्सफॉलो करें
69,712सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: