Thursday, June 13, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयकनाडा ने वापस बुलाए 41 राजनयिक, भारत ने 20 अक्टूबर तक का दिया था...

कनाडा ने वापस बुलाए 41 राजनयिक, भारत ने 20 अक्टूबर तक का दिया था समय: खालिस्तान से जस्टिन ट्रूडो की हमदर्दी संबंधों पर भारी

भारत ने कहा था कि कनाडा के राजनयिक ज्यादा संख्या में भारत में हैं और वो गलत कामों को अंजाम दे रहे हैं। भारत ने कनाडा को 21 राजनयिकों को छोड़कर बाकियों को वापस बुलाने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय दिया था।

भारत ने कनाडा को चेतावनी दी थी कि वो अपने राजनयिकों को वापस बुला ले, वर्ना 20 अक्टूबर को उन सभी की ‘डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी’ छीन ली जाएगी। ऐसा करने का मतलब होगा कि वो सभी राजनयिक महज विदेशी नागरिक होकर रह जाएँगे, जिनपर भारत के कानून लागू होंगे। अब कनाडा ने हड़बड़ाहट में 21 राजनयिकों को छोड़कर बाकियों को कनाडा वापस बुला लिया है। भारत में कनाडा के कुल 62 राजनयिक और उनके परिवार के लोग रह रहे थे।

राजनयिकों के भारत से निकलने के साथ ही कनाडा और भारत के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है, जिसकी शुरुआत कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने की थी। उन्होंने एक खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या में भारत पर आरोप लगाए थे और अपने देश की संसद में भी बयान दिया था। हालाँकि, भारत ने स्पष्ट तौर पर उनके आरोपों को खारिज कर दिया था।

भारत से 41 कनाडाई राजनयिकों और उनके परिजनों के वापस लौटने के बाद भारत में कनाडा के ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा कि चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु स्थित तीनों वाणिज्य दूतावासों में सभी व्यक्तिगत सेवाओं को रोक दिया है। वहीं सीमित स्तर पर सभी कामकाज दिल्ली स्थित दूतावास से ही होंगे।

कनाडा की विदेश मंत्री ने कही ये बात

कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली इस बारे में बयान देते हुए कहा, “भारत ने 20 अक्टूबर तक 21 राजनयिकों को छोड़कर बाकी सभी की ‘डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी’ गलत तरीके से खत्म कर दी थी। इसकी वजह से 41 राजनयिकों और उनके 42 परिजनों की व्यक्तिगत सुरक्षा को भी खतरा था। इसलिए हमनें सभी को हटा लिया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस निर्णय से दोनों देशों के बीच कामकाज में दिक्कत आएगी। दुर्भाग्य से हमें चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु स्थित वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत सेवाएँ रोकनी पड़ रही हैं।”

निज्जर की हत्या के आरोप लगाने के बाद गर्माया मामला

जस्टिन ट्रूडो द्वारा संसद में भारत पर आरोप लगाए जाने के बाद से ही भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव बढ़ने लगा था। भारत ने कनाडा में वीजा सेवाओं को रोक दिया था, तो कनाडा ने भी इन सुविधाओं को कम कर दिया था। अभी 21 राजनयिक दिल्ली स्थित दूतावास से ही काम कर पाएँगे। कनाडा ने कुल 41 राजनयिकों और उनके परिजनों को वापस बुला लिया है। भारत ने कहा था कि कनाडा के राजनयिक ज्यादा संख्या में भारत में हैं और वो गलत कामों को अंजाम दे रहे हैं। भारत ने कनाडा को 21 राजनयिकों को छोड़कर बाकियों को वापस बुलाने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय दिया था।

बता दें कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने राजनयिकों की संख्या का मसला कई बार कनाडा के सामने उठाया था। भारत ने साफ शब्दों में कहा था कि दोनों देशों की राजनयिकों की संख्या में असमानता है। जितने भारतीय राजनयिक कनाडा में हैं, उससे कहीं अधिक कनाडाई राजनयिक भारत में हैं।

भारत का यह निर्णय दोनों देशों के बीच जारी रस्साकशी के बीच आया है। 18 सितम्बर, 2023 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाने का आरोप लगाया था। इसके बाद कनाडा ने एक भारतीय राजनयिक को भी निष्कासित किया था।

भारत ने इसका कड़ा विरोध करते हुए बदले में एक कनाडाई राजनयिक को निष्कासित किया था। भारत ने कनाडा के आरोपों को भी खारिज किया था। इसके साथ ही भारत ने कनाडाई राजनयिकों पर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए थे। भारत ने कहा था कि कनाडा आतंकियों और अपराधियों को शरण देता है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कश्मीर समस्या का इजरायल जैसा समाधान’ वाले आनंद रंगनाथन का JNU में पुतला दहन प्लान: कश्मीरी हिंदू संगठन ने JNUSU को भेजा कानूनी नोटिस

जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए 'इजरायल जैसे समाधान' की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

शादीशुदा महिला ने ‘यादव’ बता गैर-मर्द से 5 साल तक बनाए शारीरिक संबंध, फिर SC/ST एक्ट और रेप का किया केस: हाई कोर्ट ने...

इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपित का ही नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता का भी है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -