Saturday, November 27, 2021
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चीन के सुधरने के नहीं नजर आ रहे आसार, सैनिकों की वापसी का मामला अटका, बैठक के बाद भी PLA सैनिक नहीं हटे पीछे: रिपोर्ट

"सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है। इसलिए यह हमारी उम्मीद है कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप चीनी पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से पूरी तरह हटने और तनाव कम करने तथा पूर्ण शांति एवं स्थिरता बहाली के लिए हमारे साथ ईमानदारी से काम करेगा।"

भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर पिछले करीब तीन महीने से तनाव जारी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ताओं का दौर चला, जिसके बाद दोनों देशों के बीच LAC से सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमति बनी। पिछले कुछ दिनों में भारत और चीन ने टकराव वाली जगहों से टुकड़ियों को पीछे भी खींचा है। हालाँकि, ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने कई जगहों पर अब भी अपनी सेना तैनात कर रखी हैं।

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर मौजूदा हालात को देखते हुए चीन की चालबाजी साफ़ दिखने लगी है। पिछले दस दिनों के भीतर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के अधिकांश विवादग्रस्त इलाकों से चीनी PLA की या तो वापसी नहीं हुई है या हुई भी है तो बेहद कम। ऐसे में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (भारतीय एनएसए और चीन के विदेश मंत्री) के बीच तनाव खत्म करने के लिए सैनिकों की वापसी को लेकर जो सहमति बनी थी, उसके अनुपालन पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।

वहीं भारत ने इस हालात पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई है कि चीन की जिनपिंग सरकार पूर्व में बनी सहमति को अमल में लाएगा, क्योंकि सीमा पर शांति स्थापित किए बगैर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि चीन द्वारा की जा रही चालबाजी का असर विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों की आने वाले बैठक में भी देखने को मिलेगा। चीन जानबूझ कर तनाव का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहा है। वर्किंग मेकेनिज्म (डब्लूएमसीसी) के तहत होने वाली इस बैठक में इस मुद्दे को भी उठाए जाने की भी सम्भावना है।

सीमा पर उत्पन्न हुए तनाव को कम करने और आपस में समझौता कराने के लिए वर्किंग मेकेनिज्म की यह बैठक पहले भी दो बार हो चुकी है। कुल मिला कर हाल ही में चीन के साथ भारत की चार बैठके हो चुकी हैं। वहीं आपसी तनाव को देखते हुए दोनों देशों के अधिकारियों ने फोन के जरिए भी मामले को सुलझाने की कोशिश की थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया, “सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है। इसलिए यह हमारी उम्मीद है कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति के अनुरूप चीनी पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों से पूरी तरह हटने और तनाव कम करने तथा पूर्ण शांति एवं स्थिरता बहाली के लिए हमारे साथ ईमानदारी से काम करेगा।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि डब्लूएमसीसी की अगली बैठक जल्द होगी, जिसमें सैनिकों की वापसी से जुड़ी प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के सैनिकों के पीछे हटने के शुरुआती कदम के बाद स्थिति में कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दोनों ही देशों के सैनिक काफी कम फासले पर मौजूद हैं। हालाँकि, सैनिकों की संख्या जरूर घटी है। फ्लैश प्वॉइंट पैंगोंग झील के किनारे से चीन के सैनिक फिंगर 4 से फिंगर 5 तक पीछे हटे हैं। झील के पास भले ही दोनों सेनाओं की बीच की दूरी 4-5 किमी. हो, लेकिन पहाड़ी इलाके में ये सिर्फ एक किमी की बात है।

ऐसे में साफ दिख रहा है कि पिछले एक हफ्ते से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कहा जा रहा था कि काफी लंबे वक्त पहले चीनी सेना फिंगर चार तक आ गई थी, जबकि भारत का दावा फिंगर 8 तक का है। करीब 600-800 मीटर की दूरी पर अभी भी 40-50 जवान करीबी से नजर बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले समझौते के आधार पर 15 जून को जहाँ झड़प हुई थी, उस इलाके से चीन 1.5 किमी. तक पीछे हट गया था। जिसके बाद दोनों देशों के बीच की सेनाओं की दूरी तीन किमी. तक हो गई थी। ऐसी स्थिति में भारतीय सेना लंबी तैयारी कर रही है और पूरी तरह से मुस्तैद है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव को कम करने के लिए चार बार कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद डेपसांग समतल क्षेत्र और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीन के अवैध निर्माण की बात कही जा रही है। भारत ने इन गतिविधियों का मुद्दा सेना के अधिकारियों की बैठक में उठाया था। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनके चीनी समकक्ष सहित विशेष प्रतिनिधियों से एलएसी पर सैन्य निर्माण के मुद्दे को हल करने के लिए बातचीत की थी।

दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई थी। डेपसांग मुद्दे को प्रमुखता से उठाने से पहले भारतीय पक्ष गलवान घाटी (PP-14), PP-15, हॉट स्प्रिंग्‍स, गोगरा और फिंगर एरिया सहित चार बिंदुओं पर विस्‍थापन प्रक्रिया पर चर्चा कर रहा था। कई दौर की चर्चा के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। जिसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई थी। 15 जून को भारत और चीनी सेना के बीच हुई खूनी झड़प के बाद युद्ध जैसे हालात बने हुए थे जिसे आपसी बातचीत के जरिए सामान्य किया गया वहीं दोनों ही देशों की सेना के बीच तय हुआ कि, अपनी पुरानी स्थित‍ि में वापस आएँगे।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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