Saturday, October 23, 2021
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ट्रंप ने मोदी से माँगी मदद, कहा- हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन दें, इससे लाखों मरीजों को होगा फायदा

ट्रंप ने ये तो नहीं बताया कि अमेरिका ने भारत से हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन की कितनी मात्रा की माँग की है लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि इससे यूएस को इस दवा के 'कई मिलियन डोज' मिल सकते हैं। ट्रंप सरकार ने इसे ड्रग को 'स्ट्रेटेजिक नेशनल स्टॉकपाइल' का हिस्सा बनाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ बातचीत की। भारत ने हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन के निर्यात पर पाबंदी लगाई हुई है। ट्रंप ने मोदी से माँग करते हुए कहा कि वो अमेरिका द्वारा ऑर्डर की गई इसकी मात्रा को रिलीज करें। बता दें कि भारत के ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड’ ने 25 मार्च को हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। ऐसा कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में इसके प्रयोग के कारण किया गया था।

इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स ने कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन नामक मेडिकल ड्रग देने का प्रस्ताव दिया था। जिस मामले में स्थिति ज्यादा ख़राब हो, वहाँ इसका प्रयोग किया जा सकता है। एनटीएफ ने कहा है कि ‘हाई रिस्क’ वाले मामलों में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालाँकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा को लेने से मना किया गया है।

इस दवा का इस्तेमाल अब तक मलेरिया से निपटने के लिए किया जाता रहा है। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में ये दवा गेमचेंजर साबित हो सकता है। ट्रंप ने भी पुष्टि की है कि उन्होंने पीएम मोदी से अमेरिका द्वारा माँगी गई हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन ड्रग्स की निर्यात करने को कहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालाँकि, भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगाते समय कहा था कि मानवता के आधार पर कुछ निश्चित शिपमेंट को अनुमति दी जा सकती है।

दशकों से मलेरिया के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले ड्रग हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन को लेकर ट्रंप सरकार उत्साहित है, क्योंकि शुरूआती जाँच एवं परीक्षण में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अमेरिका में 1500 कोरोना मरीजों के ऊपर इस ड्रग का कुछ अन्य दवाओं के कॉम्बिनेशन के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अगले कुछ सप्ताहों में अगर अमेरिका में कोरोना का वैक्सीन नहीं आया तो ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन में ‘जंगल के आग की तरह’ तेज़ी आने की आशंका है

हालाँकि, ट्रंप ने ये तो नहीं बताया कि अमेरिका ने भारत से हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन की कितनी मात्रा की माँग की है लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि इससे यूएस को इस दवा के ‘कई मिलियन डोज’ मिल सकते हैं। ट्रंप सरकार ने इसे ड्रग को ‘स्ट्रेटेजिक नेशनल स्टॉकपाइल’ का हिस्सा बनाया है। पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के अलावा ब्राजील, बोलसेनारो के राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी कोरोना विपदा पर चर्चा की। गौरतलब है कि अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहॉं अब 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 8,452 लोगों की जान भी जा चुकी है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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