Tuesday, July 5, 2022
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जब भारत गुलाम था, तब हम स्वतंत्र थे: नेपाली राजदूत ने कहा- चीन नहीं, भारत ने हमारी जमीन पर किया कब्जा

नेपाली राजदूत ने 'वन चाइना पॉलिसी' का समर्थन करते हुए कहा कि तिब्बत पूरी तरह चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत और नेपाल की संस्कृति समान है, लेकिन भारत से नेपाल में कुछ लोग घुस आते हैं, जो हमारी जमीन का दुरूपयोग करते हैं।

नेपाल में चीन की घुसपैठ से वहाँ के अधिकारी परेशान हैं। बताया जाता है कि नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने चीनी अतिक्रमण पर आँख मूँद रखी है। इस बीच, चीन में नेपाल के राजदूत महेंद्र बहादुर पांडेय ने उलटा भारत पर ही अपने देश की जमीन कब्जाने का आरोप लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा और नेपाली नेताओं की चीन यात्रा के दौरान 20 से भी अधिक MoU साइन किए गए, जिन पर अब दोनों देश आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ से ये बातें कही।

चीन में नेपाल के राजदूत महेंद्र बहादुर पांडेय से ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने पूछा कि जिस तरह से विदेशी मीडिया, खासकर भारत की, ये खबर फैला रही है कि चीन के नेपाल से बढ़ते रिश्तों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं, इस पर वो क्या कहेंगे? नेपाल के राजदूत ने इसे एकपक्षीय और बिना फैक्ट्स वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘फियर साइकोलॉजी’ के कारण ऐसा किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जब भारत एक कॉलोनी हुआ करता था, परतंत्र था, तब नेपाल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र था। उन्होंने कहा कि नेपाल न तो खास विचारधारा और न किसी खास सत्ता की तरफ झुकाव रखता है। उन्होंने कहा कि या तो भारतीय मीडिया पक्षपाती है या फिर उसे किसी ने भ्रम में डाल रखा है। भारत के बारे में उन्होंने कहा कि पड़ोसियों को पड़ोसियों से डरना नहीं चाहिए, हाथ मिला कर समझ विकसित करनी चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत की लम्बी सीमा पर कई सारी समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ चीन के साथ नेपाल का सारा सीमा विवाद सुलझा लिया गया है, भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने ये भी कहा कि 1962 के युद्ध में हार के बाद कुछ भारतीय सैनिक नेपाल की जमीन पर ही रह गए थे और बाद में उस पर दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार निवेदन के बावजूद नज़रअंदाज़ करता रहा, लेकिन अब बातचीत की टेबल पर बैठने के लिए तैयार है।

उन्होंने कोरोना वायरस को ‘नियंत्रित’ करने के लिए भी चीन की तारीफ करते हुए कहा कि यहाँ के नेताओं ने लोगों की जान की कीमत को समझा और नेपाल की भी सहायता की। उन्होंने ‘वन चाइना पॉलिसी’ का समर्थन करते हुए कहा कि तिब्बत पूरी तरह चीन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तिब्बत और नेपाल की संस्कृति समान है, लेकिन भारत से नेपाल में कुछ लोग घुस आते हैं, जो हमारी जमीन का दुरूपयोग करते हैं।

चीन में नेपाल के राजदूत ने कहा कि भारत में मीडिया ने जम कर ‘फेक प्रोपेगेंडा’ फैलाया कि नेपाल और चीन के रिश्ते अच्छे नहीं हैं, लेकिन ऐसा कोई कारण ही नहीं है जिससे नेपाल के साथ चीन के रिश्ते बिगड़े। साथ ही उन्होंने हॉन्गकॉन्ग और ताइवान को भी चीन का हिस्सा करार दिया। उन्होंने नेपाल और चीन के बीच रेलवे प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने की बात की। साथ ही कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग मैत्रीपूर्ण और स्वभाविक है।

मूल रूप से नुवाकोट के महेंद्र बहादुर पांडेय नेपाल के विदेश मंत्री भी रहे हैं और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं। उन्हीने 1975-95 में 20 सालों तक त्रिभुवन विश्वविद्यालय में बतौर अंग्रेजी प्रोफेसर कार्य किया। वहीं से अंग्रेजी में मास्टर्स की डिग्री लेने वाले पांडेय ने वकालत की पढ़ाई भी की है। 1999 में उन्हें पहली बार संसद के लिए चुना गया और 2006 में वो पार्टी के चीफ ह्विप बने। अब उन्हें चीन में राजदूत बना कर भेजा गया है।

हाल ही में नेपाल की जमीन पर चीन द्वारा 9 इमारतें खड़ी किए जाने की बात सामने आई थी। ताज़ा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये इलाका नेपाल के कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है। शिकायत मिलने के बाद ‘चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (CDO)’ चिरंजीवी गिरी के नेतृत्व में नेपाली अधिकारियों की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन चीन की फौज ने अधिकारियों को भगा दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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