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‘भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना हमारे प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं’: अमेरिका ने साफ़ किया, जल्द हो सकती है बड़ी डील

भारत में प्रतिदिन लगभग 45 लाख बैरल तेल खपत होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है और अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक कुल 17.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था। इसमें से लगभग 2 प्रतिशत खरीद ही रूस से होती रही है।

यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण वैश्विक प्रतिबंध झेल रहे रूस (Russia-Ukraine War) ने भारत को कम कीमत पर क्रूड ऑयल (Crude Oil) खरीदने का प्रस्ताव दिया था। भारत सरकार इस प्रस्ताव को लेकर गंभीरता से विचार कर रही थी। अब अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि भारत रूस से क्रूड ऑयल खरीदता है तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (6,101 करोड़ रुपए) की सहायता देने का ऐलान किया है।

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव जेन साकी (Jen Psaki) ने मंगलवार (15 मार्च) को कहा कि रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए सभी देशों से आग्रह करेगा। जेन ने कहा कि प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होने के बावजूद जब मौजूदा समय का इतिहास लिखा जाएगा तो इसे रूसी हमले का समर्थन माना जाएगा।

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर रूस से सैन्य आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर है। वहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद डॉ एमी बेरा ने रूस से भारत द्वारा कम दाम तेल खरीदे जाने की खबरों पर निराशा जताते हुए कहा कि इतिहास के इस नाजुक मोड़ पर जब दुनिया भर के लोग रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन के साथ खड़े हो रहे हैं, तब भारत पुतिन के पक्ष में खड़ा दिखाई देगा।

बता दें कि भारत में प्रतिदिन लगभग 45 लाख बैरल तेल खपत होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है और अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक कुल 17.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था। इसमें से लगभग 2 प्रतिशत खरीद ही रूस से होती रही है। यूक्रेन संकट के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। ऐसे में रूस द्वारा रूस द्वारा दिया गया सस्ते कच्चा तेल को खरीदना भारत की एक तरह मजबूरी है।

सूत्रों की मानें तो भारत इस डील के काफी करीब है और रूस से लगभग 35 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदेगा। इस डील में भारत को कच्चा तेल देने में शिपिंग और इंश्योरेंस की जिम्मेदारी रूस की होगी। बता दें कि रूस से कच्चा तेल खरीदने में भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह एक बड़ी अड़चन रही है।

दरअसल, अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच रूस ने मित्र देशों से अपील की है कि वे उसके साथ निवेश और कारोबार जारी रखें। हालाँकि, भारत यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन नहीं करता है, लेकिन अपने पुराने संबंधों के कारण वह यूएन में रूस के खिलाफ वोटिंग में गैर-हाजिर रहा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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