Tuesday, November 30, 2021
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयभारत के साथ जापान, LAC पर चीन की हरकतों का किया विरोध

भारत के साथ जापान, LAC पर चीन की हरकतों का किया विरोध

"मेरी विदेश सचिव श्रृंगला से अच्‍छी बातचीत हुई है। एलएसी पर श्रृंगला की ओर से दी गई जानकारी की और भारत सरकार के शांतिपूर्व समाधान के प्रयासों की मैं प्रशंसा करता हॅं। जापान आशा करता है कि इस विवाद का शांतिपूर्वक समाधान होगा। जापान यथास्थिति को बदलने की किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है।"

गलवान में चीनी सेना के धोखे से किए गए वार के बाद से दुनिया के कई देश खुलकर भारत के साथ खड़े हुए हैं। जापान भी अब इन देशों में शामिल हो गया है।

भारत का समर्थन करते हुए उसने कहा है कि वह नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने वाली किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करता है। भारत की सराहना करते हुए मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद जताई है।

जापान के भारत में राजदूत सतोशी सुजुकी ने बताया कि उनकी भारत के विदेश सचिव हर्ष वी श्रृंगला से इस बारे में चर्चा हुई थी। सतोशी सुजुकी ने ट्वीट कर कहा, “मेरी विदेश सचिव श्रृंगला से अच्‍छी बातचीत हुई है। एलएसी पर श्रृंगला की ओर से दी गई जानकारी की और भारत सरकार के शांतिपूर्व समाधान के प्रयासों की मैं प्रशंसा करता हॅं। जापान आशा करता है कि इस विवाद का शांतिपूर्वक समाधान होगा। जापान यथास्थिति को बदलने की किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है।”

जापान की तरफ से यह प्रतिक्रिया तब आई है जब उसने एक विधेयक में संशोधन किया है। इसके बाद वह भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ भी डिफेन्स इंटेलिजेंस साझा कर पाएगा। इस विधेयक के लागू होने से पहले तक जापान केवल अमेरिका के साथ डिफेन्स इंटेलिजेंस साझा कर सकता था।

इसके अलावा जापान सरकार के विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में इस मामले पर अपना मत रखा था। मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि वह इस मामले पर शुरू से निगाह रखे हुए है, क्योंकि ऐसी घटनाओं का सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।  

इसके पहले 19 जून को भी सतोशी सुजुकी ने सीमा पर चीन और भारत की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प में सैनिकों के बलिदान पर संवेदना जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम भारत के नागरिकों और गलवान घाटी में अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए बलिदान होने वाले सैनिकों के परिजनों के लिए गहरी संवेदना जताते हैं।”

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कभी ज़िंदा जलाया, कभी काट कर टाँगा: ₹60000 करोड़ का नुकसान, हत्या-बलात्कार और हिंसा – ये सब देश को देकर जाएँगे ‘किसान’

'किसान आंदोलन' के कारण देश को 60,000 करोड़ रुपए का घाटा सहना पड़ा। हत्या और बलात्कार की घटनाएँ हुईं। आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

बारबाडोस 400 साल बाद ब्रिटेन से अलग होकर बना 55वाँ गणतंत्र देश: महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का शासन पूरी तरह से खत्म

बारबाडोस को कैरिबियाई देशों का सबसे अमीर देश माना जाता है। यह 1966 में आजाद हो गया था, लेकिन तब से यहाँ क्वीन एलीजाबेथ का शासन चलता आ रहा था।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
140,729FollowersFollow
412,000SubscribersSubscribe