Homeदेश-समाजगुलेल से लगाए निशाने, भारतीय मजदूरों पर पत्थर फेंका: नेपाल की ओर से उत्तराखंड...

गुलेल से लगाए निशाने, भारतीय मजदूरों पर पत्थर फेंका: नेपाल की ओर से उत्तराखंड में फिर हुई पत्थरबाजी, डंपर के शीटे टूटे, ड्राइवर समेत 2 घायल

इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि पत्थरबाजी की घटना के कारण पहले ही लेट हो चुका है। ऐसे में इस तरह की घटनाएँ थमती नहीं हैं तो मजदूर और वाहनकर्मी भी यहाँ काम करने से डरेंगे। निर्माण कार्य में लगी कंपनी ने इस मसले में सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। परियोजना में शामिल लोग प्रशासन से सुरक्षा की गुहार भी लगा रहे हैं।

उत्तराखंड के धारचूला (Dharchula, Uttarakhand) स्थित घटखोला में बाँध बनाने में लगे मजदूरों पर नेपाल की ओर से फिर पथराव किया गया है। पत्थरबाजी की इस घटना में वहाँ मौजूद डंपर और जेसीबी के शीशे टूट गए। गुलेलों से की गई पत्थरबाजी में एक चालक और एक मजदूर जख्मी हो गए हैं। 

दरअसल, धारचूला में काली नदी के किनारे भारत अपने क्षेत्र में तटबंध का निर्माण कर रहा है। इस निर्माण कार्य में कई मजदूर और वाहन लगे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस तटबंध को पूरा नहीं किया जाता है तो अगले साल बारिश में धारचूला का एक बड़ा हिस्सा काली नदी में समा जाएगा।

काली नदी पर तटबंध निर्माण का यह काम दोनों देशों की सहमति के बाद शुरू किया गया है। इसके बावजूद नेपाल द्वारा लगातार इसमें बाधा डालने की कोशिश की जा रही है। पथराव की हालिया घटना नेपाल की ओर से की गई पत्थरबाजी की 11वीं घटना है।

बताया जा रहा है कि तटबंध का निर्माण का काम चल रहा था, उसी दौरान शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को नेपाल की ओर से कुछ लोग इकट्ठे हुए और श्रमिकों और निर्माण कार्य में लगी गाड़ियों पर पत्थरबाजी करने लगे। इंजीनियरों का कहना है कि पत्थरबाजी करने वाले लोग गुलेलों इस्तेमाल कर रहे थे। इससे श्रमिक डर गए और काम को बंद कर दिया।

इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि पत्थरबाजी की घटना के कारण पहले ही लेट हो चुका है। ऐसे में इस तरह की घटनाएँ थमती नहीं हैं तो मजदूर और वाहनकर्मी भी यहाँ काम करने से डरेंगे। निर्माण कार्य में लगी कंपनी ने इस मसले में सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। परियोजना में शामिल लोग प्रशासन से सुरक्षा की गुहार भी लगा रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं, पढ़ें- CJP...

कॉकरोचों के प्रदर्शन में छात्रों के मुद्दे नहीं बल्कि आजादी के नारे, डफली गैंग, तिरंगे से बदसलूकी और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान दिखा। पढ़ें रिपोर्ट।

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद...

अन्नामलाई ने कहा कि तमिल संस्कृति-भाषा पर गर्व और भारत माता के प्रति समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
- विज्ञापन -