Wednesday, August 4, 2021
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30 साल का ताहेर 25 साल के लिए चीनी जेल में कैद, ऑस्ट्रेलिया में राह देख रही 26 साल की बीवीः उइगर होने की सजा

12 अप्रैल 2017 की तारीख में इस जोड़े ने मेलबर्न के लिए अपनी फ्लाइट बुक की। लेकिन इससे पहले ये ऑस्ट्रेलिया के लिए निकलते, 10 अप्रैल 2017 को ही पुलिस इनके घर आ गई।

साल 2016 में मेह्रे मेज़ेन्सोफ़ (Mehray Mezensof) नाम की ऑस्ट्रेलियाई युवती पहली बार चीन के शिनजियांग गई। उसे मीरजात ताहेर (Mirzat Taher) नाम के उइगर युवक से प्रेम हो गया। कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली। मेज़ेन्सोफ़ की पैदाइश ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। उसके माता-पिता 35 साल पहले ऑस्ट्रेलिया चले गए थे। लिहाजा वह ऑस्ट्रेलिया की स्थायी निवासी थी। उससे शादी के बाद ताहेर भी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता पाने के लिए योग्य था।

एबीसी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने शिनजियांग की राजधानी उरुमकी (Urumqi) में शादी की और कुछ समय बाद यानी 1 अप्रैल 2017 में युवक का ऑस्ट्रेलिया जाने का वीजा लग गया। ये वही समय था जब चीन प्रशासन ने उइगर मुस्लिमों पर अपना अत्याचार शुरू किया था।

12 अप्रैल 2017 की तारीख में इस जोड़े ने मेलबर्न के लिए अपनी फ्लाइट बुक की। लेकिन इससे पहले ये ऑस्ट्रेलिया के लिए निकलते, 10 अप्रैल 2017 को ही पुलिस इनके घर आ गई। पुलिस ने ताहेर से पूछा कि क्या उसने कोई विदेशी यात्रा की है? चूँकि ताहेर एक साल तुर्की रहकर आया था, तो पुलिस ने फौरन उसे अपनी हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए साथ ले गई।

डिटेंशन कैंप में ताहेर को भेजा

पूछताछ के बाद ताहेर डिटेंशन कैम्प में भेज दिया गया। 10 माह वहाँ गुजारने के बाद वह 22 मई 2019 को छोड़ा गया। कुछ हफ्ते बाद उसकी मुलाकात अपनी पत्नी से उरुकमी एयरपोर्ट पर हुई। ताहेर ने बताया कि कॉन्सनट्रेशन कैंप में उसका ब्रेनवॉश किया गया। उसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में पढ़ाया गया और उनके कई भाषण याद करवाए गए। इतना ही नहीं, जब उसे रिहा किया गया तब वह कड़ी निगरानी में था।

मेज़ेन्सोफ़ का वीजा एक्सपायर हो रहा था और चीनी प्रशासन ताहेर का पासपोर्ट देने को तैयार नहीं थी। इसी दौरान मेज़ेन्सोफ़ का वीजा एक्सटेंड करने का एप्लीकेशन भी निरस्त कर दिया गया और उसे बिना पति के ऑस्ट्रेलिया लौटना पड़ा। 

मेज़ेन्सोफ़ जब ऑस्ट्रेलिया वापस तब चीन में कोरोना दस्तक दे चुका था। नतीजन वह दोबारा नहीं लौट सकी। लेकिन पति-पत्नी एक-दूसरे से बात करते रहते थे। 19 मई 2020 को अचानक ताहेर ने पत्नी के संदेशों का रिप्लाई देना बंद कर दिया। पूछताछ में पता चला कि पुलिस ने दोबारा उसके पति को उठाकर कैंप में भेज दिया है।

अभी कुछ समय पहले जब ताहेर को ऑस्ट्रेलिया ने स्थायी निवासी का प्रमाण दिया, तब पता चला कि उसे कुछ हफ्ते पहले ही चीनी प्रशासन दोबारा कब्जे में ले चुकी थी। 23 अक्टूबर 2020 को हामी पुलिस ने ताहेर को आतंकी संगठनों के साथ संबंध होने के आरोप में पकड़ा।

ताहेर को चीनी प्रशासन ने दी 25 साल की सजा

साल 2021 के जनवरी में ताहेर के केस पर हामी की कोर्ट ने सुनवाई की और 2 हफ्ते पहले उसे 25 साल जेल की सजा सुना दी गई। मेज़ेन्सोफ़ का कहना है कि उसके पति को इसलिए जेल भेजा गया क्योंकि वह तुर्की में एक साल रहकर लौटा था। उस पर वहाँ की पुलिस अलगाववाद का आरोप लगा रही है। साथ ही ये भी कह रही है वह ऐसी राजनीतिक गतिविधियों में लिप्त था जिनका मकसद अलग देश बनाना था।

महिला अपने पति पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि उसका पति तुर्की सिर्फ छुट्टियों पर गया था, लेकिन वहाँ उसे चीजें पसंद आईं और वह एक साल रुक कर वहाँ काम करने लगा। महिला के मुताबिक चीनी कोर्ट ने न तो उसे या फिर न ही ताहेर के किसी परिवार सदस्य को सजा से जुड़ा कोई दस्तावेज दिया है।

एबीसी के मुताबिक, मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने चीनी अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, मगर अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं चीन के ज्यूडिशियल प्रोसेस इन्फॉर्मेशन वेबसाइट पर ताहेर के केस का उल्लेख नहीं है, जबकि 2017 में तुर्की प्रशासन ने बताया था कि ताहेर का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

बता दें कि चीन के पास 26 ऐसे संवेदनशील देशों की सूची है जो उनकी रडार पर हमेशा रहते हैं। तुर्की इन्हीं देशों में से एक है। अब 30 साल का ताहेर चीन में 25 साल की सजा के लिए जेल में बंद है जबकि ऑस्ट्रेलिया में उसकी 26 साल की बीवी उसकी राह देख रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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