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मुस्लिमों कैदियों की जमानत के लिए बजट में मोदी सरकार ने नहीं किया है कोई विशेष प्रावधान, मीडिया की भ्रामक रिपोर्टों का जानिए सच

वित्त मंत्री ने उन लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात कही है जो जेल का जुर्माना और जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। मंत्री ने कहा था, ''उन गरीब व्यक्तियों को सहायता पहुँचाई जाएगी जो जेलों में हैं और जुर्माना या जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।"

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Fm Nirmala Sitharaman) ने बुधवार (1 फरवरी 2023) को केंद्रीय बजट पेश किया। बाद में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में मुस्लिम कैदियों की रिहाई और जमानत राशि में मदद देने का प्रावधान है। रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

ज़ी न्यूज़ (ZEE NEWS) में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गरीब कैदियों के लिए केंद्र की नई योजनाओं से मुस्लिम कैदियों को मदद मिल सकती है। खबर की हेडिंग से लोग कन्फ्यूज हो गए।

इमेज क्रेडिट-जी न्यूज

जल्द ही, कई सोशल मीडिया यूजर्स मुस्लिम दोषियों को रिहा करने और उन्हें जमानत राशि प्रदान करने की रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार को घेरने लगे और सरकार पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया।

क्या केंद्रीय बजट 2023 मुस्लिम कैदियों को रिहा करने की बात करता है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित केंद्रीय बजट 2023 में मुस्लिम कैदियों की जल्द रिहाई या उन्हें जमानत प्रदान करने के उद्देश्य से किसी विशेष योजना का प्रावधान नहीं है। वित्त मंत्री ने उन लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात कही है जो जेल का जुर्माना (Prison Penalties) और जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। मंत्री ने कहा था, ”उन गरीब व्यक्तियों को सहायता पहुँचाई जाएगी जो जेलों में हैं और जुर्माना या जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।”

यह घोषणा पिछले साल पीएम मोदी द्वारा की गई अपील के अनुरूप है। इस अपील में उन्होंने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के दौरान जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता देने और मानवीय संवेदनाओं के आधार पर उन्हें कानून के अनुसार रिहा करने को कहा था। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में  प्रत्येक जिले में मौजूद एक समिति मामलों की समीक्षा करेगा और जब भी संभव होगा जमानत के आधार पर पात्र कैदियों को रिहा किया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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