Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाचीन के साथ तनातनी के बीच सेना को इमरजेंसी फंड, 500 करोड़ रुपए तक...

चीन के साथ तनातनी के बीच सेना को इमरजेंसी फंड, 500 करोड़ रुपए तक के हथियार खरीद सकेंगे

सरकार ने तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों को खतरनाक हथियारों की तात्‍कालिक और आपात खरीद के लिए 500 करोड़ रुपए तक की वित्तीय शक्तियाँ दी हैं। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है कि जब पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना ने बड़ी संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती कर दी है।

चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच केन्द्र सरकार ने तीनों सेनाओं के लिए 500 करोड़ रुपए के इमरजेंसी फंड को मंजूरी दी है। इस रकम से सेना जरूरत के मुताबिक हथियार और गोला-बारूद खरीद सकती है।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक सरकार ने तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों को खतरनाक हथियारों की तात्‍कालिक और आपात खरीद के लिए 500 करोड़ रुपए तक की वित्तीय शक्तियाँ दी हैं। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है कि जब पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना ने बड़ी संख्या में अपने सैनिकों की तैनाती कर दी है।

इससे पहले सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए तीनों सेनाओं ने पहले ही आपात हथियारों की सूची को बनाना शुरू कर दिया था। इस सूचा में तात्कालिक जरूरत और कम समय में खरीदे जाने वाले हथियारों को रखा गया है।

आज तक की खबर के मुताबिक रक्षा मंत्री कल (22 जून, 2020) रूस जा रहे हैं। सम्भावना जताई जा रही है कि इस दौरान सेना के लिए इमरजेंसी हथियारों की खरीद की जा सकती है।

हालाँकि ऐसा पहली बार नहीं है कि जब सरकार ने सेनाओं को हथियार खरीद के लिए आपात फंड को मंजूरी दी है। इससे पहले भी उरी हमले और पाकिस्तान के खिलाफ बालाकोट हवाई हमलों के बाद भी सशस्त्र बलों को इसी तरह की वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की गईं थी। वैसे भी उरी हमले के बाद सेना ने बड़ी संख्या में आधुनिक हथियारों के साथ कुछ मिसाइलों का भी स्टॉक किया है।

गौरतलब है कि बीते सोमवार 15 जून को गलवान घाटी पर चीनी सैनिकों से हुई हिंसक झड़प में 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे, जबकि चीन के 43 सैनिकों के मार जाने की खबर है। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -