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‘ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए’: गुजरात कोर्ट ने करामत अली, अयूब और नौशाद को सुनाई उम्रकैद, ISI के लिए करते थे भारतीय सेना की जासूसी

"ये भारत में रहते हैं। लेकिन इनमें देश प्रेम नहीं है। पाकिस्तान के प्रति इनका प्रेम झलकता है। इन्होंने खुद की और पाकिस्तान के हित की सोची। देश के लिए खतरा पैदा किया। ऐसे लोगों की पहचान कर सरकार को उन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए या फिर ऐसे लोगों को खुद से देश छोड़ देना चाहिए।"

गुजरात की एक अदालत ने पाकिस्तान के तीन जासूसों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। इनकी पहचान करामत अली फकीर उर्फ सिराजुद्दीन, मोहम्मद अयूब शेख और नौशाद अली के तौर पर सामने आई है। 17 जुलाई 2023 को इन्हें सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों को खुद से देश छोड़ देना चाहिए। उन्हें अपने देश के 140 करोड़ लोगों की चिंता नहीं है। इनमें पाकिस्तान के प्रति प्रेम दिखता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अहमदाबाद सत्र न्यायालय में करीब 10 साल चली सुनवाई के बाद तीनों जासूसों को जज अम्बालाल पटेल ने सजा सुनाई है। तीनों पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी भेजते थे। इन्हें सजा सुनाते हुए जज ने कहा, “ये भारत में रहते हैं। लेकिन इनमें देश प्रेम नहीं है। पाकिस्तान के प्रति इनका प्रेम झलकता है। इन्होंने खुद की और पाकिस्तान के हित की सोची। देश के लिए खतरा पैदा किया। ऐसे लोगों की पहचान कर सरकार को उन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए या फिर ऐसे लोगों को खुद से देश छोड़ देना चाहिए।”

क्या है मामला

करामत अली उर्फ सिराजुद्दीन, मोहम्मद अयूब शेख और नौशाद अली को अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रान्च ने साल 2012 में भारतीय सेना की ख़ुफ़िया जानकारी पाकिस्तान को भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया था। ये तीनों तैमूर और ताहिर नाम के ISI एजेंट के सम्पर्क में थे। पूछताछ में पता चला कि सिराजुद्दीन और अयूब के रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। ये दोनों साल 2007 में रिश्तेदारों से मिलने के लिए कराची गए थे। वहीं पर वे ISI के सम्पर्क में आए। उन्हें भारत से सूचनाओं को भेजने की ट्रेनिंग दी गई। बाद में इनके साथ नौशाद अली भी शामिल हो गया। इन तीनों ने कच्छ, अहमदाबाद, गाँधीनगर और राजस्थान के कुछ हिस्सों में मौजूद सैन्य ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को भेजी थी।

ख़ुफ़िया सूचनाओं को भेजने के लिए इन्होंने ईमेल ID [email protected] और nandkeshwar@yahoo. com बना रखी थी। इसी में वो संदेशों को ड्राफ्ट कर देते थे। पाकिस्तानी एजेंटों के पास भी इस मेल आईडी का पासवर्ड हुआ करता था, जहाँ से वो कोड में भेजे गए ख़ुफ़िया संदेशों को पढ़ लिया करते थे। इन संदेशों में लिखा था- भाई मैं ठीक हूँ। 085 वाले मामू के बच्चे बाड़मेर से आ गए हैं। हवाई वाले मामू के बच्चे 3118 नए भर्ती हुए हैं, 5 हजार अंडे भिजवा देना। जब पुलिस ने इसे डिकोड किया तो 085 का मतलब गाँधीनगर मिलिट्री कैम्प निकला। वहीं अंडा का अर्थ पैसे से था।

इन सभी को दुबई जैसी जगहों से हर माह 5 से 8 हजार रुपए भेजे जा रहे थे। नौशाद और अयूब को गिरफ्तारी के कुछ समय बाद जमानत मिल गई थी, जबकि सिराजुद्दीन 2012 से ही जेल में है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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