Monday, June 17, 2024
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यूपी ATS ने टेरर फंडिंग केस में दिल्ली से मोहम्मद अब्दुल को दबोचा: 500 बैंक अकाउंट की होगी पड़ताल, घुसपैठियों के लिए आई विदेशी फंडिंग

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) को मंगलवार (20 दिसंबर,2023) को टेरर फंडिंग केस में एक शख्स को धरने में कामयाबी हाथ लगी है। ATS ने इसे नई दिल्ली के निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। इसकी पहचान 37 साल के मोहम्मद अब्दुल अव्वल के रूप में हुई है।

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (यूपी एटीएस) को मंगलवार (20 दिसंबर,2023) को टेरर फंडिंग केस में एक शख्स को धरने में कामयाबी हाथ लगी है। ATS ने इसे नई दिल्ली के निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। इसकी पहचान 37 साल के मोहम्मद अब्दुल अव्वल के रूप में हुई है।

अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी करने वाले सिंडिकेट का सदस्य अव्वल लखनऊ के नदवतुल उलमा का एक पूर्व छात्र था। हालाँकि मूल रूप से ये असम के गोलपारा के रहने वाला है। साल 2018 से ये दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया हुए था। ATS के मुताबिक, बीते पाँच साल से मोहम्मद अब्दुल दिल्ली में जामिया नगर ओखला, श्रम विहार में रह रहा है।

मदरसे की तालीम से 12 वीं करके अब्दुल किराए की दुकान में गैरकानूनी तरीके से बैंक खाते खोलने और मनी ट्राँसफर का काम कर रहा था। इसके लिए उसने फीनो बैंक की मर्चेंट आईडी ले रखी थी।

यूपी ATS को मिला था टेरर फंडिंग पर इनपुट

यूपी एटीएस के एक अधिकारी के 19 दिसंबर, 2023 को दिए बयान के मुताबिक यूपी एटीएस एनसीआर और दिल्ली में रजिस्टर्ड 500 से अधिक ‘संदिग्ध’ बैंक खातों की जाँच कर रही है। इन खातों में दिल्ली की एनजीओ का पैसा पहुँचता है। ये एनजीओ समाज की भलाई के कामों के लिए दान के तौर पर विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम ( एफसीआरए) के तहत विदेशी फंडिंग पा रहा है।

यूपी एटीएस को बीते दिनों इनपुट मिला था कि कुछ लोगों ने एक सिंडिकेट तैयार करवाया है। इसके जरिए वो अवैध घुसपैठियों की पहचान छिपाते थे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें भारत में ठहराते थे। इस तरह से ऐसे लोगों की आर्थिक मदद कर वो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। इस इनपुट के आधार पर एटीएस की टीम ने 5 आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

इन आरोपितों में तीन बांग्लादेशी अदिलुर रहमान असरफी, तानिया मंडल, इब्राहिम खान और दो पश्चिम बंगाल के अबु हुरैरा गाजी, शेख नजीबुल हक थे। इसी कड़ी में पकड़ा गया अब्दुल अव्वल छठवाँ आरोपित है।

आरोपित अब्दुल अव्वल दिल्ली के ऊपर बताए गए एनजीओ के बैंक खातों से पैसा लेता था। वो इस पैसे को देश में अवैध रूप रहने वाले बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम से एक निजी बैंक में खोले गए खातों में पहुँचाने का काम करता था।

यूपी एटीएस को इस बात पर संदेह है कि इन फंड्स का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग के लिए किया गया था, क्योंकि पिछले चार साल में इसी तरह के खातों में लगभग 20 करोड़ रुपए ट्राँसफर किए गए थे।

10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR है दर्ज

टेरर फंडिंग मामले में यूपी एटीएस ने 11 अक्टूबर 2023 को 10 संदिग्ध आतंकवादियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इन आरोपितों पर भारत में मस्जिद बनाने के लिए विदेशों से अवैध रूप से धन माँगने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में बसाने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।

इसमें आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाजी, शेख नाजीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफिलुद्दीन, अजीम, अबू सालेह, अब्दुल गफ्फार, अब्दुल्ला गाजी और अब- का नाम शामिल हैं। अब्दुल अव्वल को गिरफ्तार करने के बाद 6 आतंकी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इनमें से अधिकतर साजिशकर्ताओं का रिश्ता देवबंद के दारुल उलूम से हैं।

कैसे होती थी टेरर फंडिग

विदेशों से देश के कई अन्य हिस्सों में लाया गया पैसा हवाला के जरिए पश्चिम बंगाल के 24 परगना के रहने वाले नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और इत्र की दुकान है।

एटीएस को आरोपित मोहम्मद अब्दुल से पूछताछ के दौरान पता चला कि दिल्ली में उसकी मुलाकात 2020 में कोविड महामारी के दौरान अब्दुल गफ्फार से हुई थी। उस दौरान बैंक खाते खोलने के नियमों में ढील दी गई थी। ये गफ्फार और उसके साथी ही थे जिन्होंने आरोपित को बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं के नाम पर एक निजी बैंक फीनो में खाते खोलने के लिए राजी किया।

ATS के मुताबिक मुलाकात के दौरान गफ्फार व उसके साथियों ने मोहम्मद अब्दुल से कहा कि अगर वो ऐसा करता है तो वो अपने NGO ‘सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट’ के एफसीआरए ( FCRA) के खाते में आने वाले विदेशी धन को इन खातों में ट्रांसफर कर देगा।

उसने आरोपित मोहम्मद अब्दुल को लालच दिया था कि बाद में वो सारा नगदी निकाल कर इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के साथ ही अवैध घुसपैठियों की मदद के लिए कर सकते हैं।

आरोपित मोहम्मद अब्दुल को लालच आया और उनसे फीनो बैंक में खाते खुलवा डाले। फिर गफ्फार के एनजीओ में यूरोपीय देशों से आई रकम को इन बैंक खातों में जमा किया गया। इसके बाद आरोपित मोहम्मद अब्दुल ने इस सारी रकम को गफ्फार के साथ मिलीभगत कर खाते से वापस निकाल बराबर बाँटा। इस नगद पैसे को सहारनपुर के आरोपित को भी पहुँचाया गया। इस आरोपित की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है।

आरोपित के मुताबिक, गफ्फार ने अपने नेटवर्क के लोगों के खोले गए कई अन्य बैंक खातों के साथ भी इसी तरह के काम को अंजाम दिया। हालाँकि गफ्फार को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है, उसे पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।

एटीएस के एक अधिकारी के मुताबिक, इस तरह से पैसा लाने के तौर-तरीकों से साफ पता चलता है कि एफसीआरए नियमों को तोड़कर साँठगाँठ कर देश में लाए गए इस पैसे का इस्तेमाल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा था। एटीएस के अधिकारी इन सभी बैंक खातों के विवरण को सावधानीपूर्वक स्कैन कर रहे हैं और आगे की जाँच चल रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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