Homeदेश-समाजछुट्टा गायों को गौशाला पहुँचाने के लिए सेल्फी विद काउ की शुरुआत

छुट्टा गायों को गौशाला पहुँचाने के लिए सेल्फी विद काउ की शुरुआत

इस पहल से जहाँ एक्सीडेंट में कमी आएगी, वहीं ट्रैफिक व्यवस्था में भी सुधार होगा। साथ ही इस अभियान से ऐसे शहरों को भी प्रेरणा मिलेगी, जहाँ सड़क पर छुट्टा गायों के घूमने से लोग परेशान हैं।

नोएडा में कुछ युवाओं द्वारा ‘सेल्फी विद काउ’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य सड़क पर या उसके किनारे बेतरतीब बैठी छुट्टा गायों को सेक्टर-63 के वाजिदपुर स्थित नए काऊ शेल्टर में पहुँचाना है। जिससे ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभियान की शुरुआत करने वाले अमित गुप्ता, अभय पांडेय और सचिन गोयल के पहल को स्थानीय लोगों का भी साथ मिलना शुरू हो गया है।

सेल्फी विद काऊ (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

स्थानीय लोग द्वारा जहाँ-तहाँ बैठी गायों के साथ सेल्फी लेकर नगर निगम प्रशासन को टैग कर रहे हैं। ऐसे में उन पर दबाव बन रहा है कि वह गायों को नए बने काऊ शेल्टर पहुँचाए।

इस पहल से जहाँ एक्सीडेंट में कमी आएगी, वहीं ट्रैफिक व्यवस्था में भी सुधार होगा। साथ ही इस अभियान से ऐसे शहरों को भी प्रेरणा मिलेगी, जहाँ सड़क पर छुट्टा गायों के घूमने से लोग परेशान हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -