Thursday, May 30, 2024
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बेटे की आड़ में सेना को ‘गाली’ देने वाले को कश्मीरी हिन्दू महिला से मिला करारा जवाब

अगर आप अपनी राजनीति में अपने परिवार का इस्तेमाल ढाल के तौर पर करेंगे तो आप अपने विरोधियों को उस ढाल पर प्रहार करने के लिए दोष नहीं दे सकते।

कश्मीर में सेना की उपस्थिति को लेकर ट्विटर पर तीखी बहस देखने को मिली। हुआ यूँ कि स्वघोषित ‘मानवाधिकार रक्षक’ खुर्रम परवेज़ ने सेना की उपस्थिति भर को अपने बच्चों के लिए भय का सबब बता दिया। जवाब में जानी-मानी दक्षिणपंथी ब्लॉगर और कश्मीर के अल्पसंख्यक डोगरा हिन्दू समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं सोनम महाजन ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अहसानफरामोशों और आतंकवादियों के समर्थकों द्वारा आपके घर पर कब्ज़ा कर लिया जाना और आपका खुद शरणार्थी शिविर में सड़ना (और भी) हृदय-विदारक है। यह (भी) ह्रदय-विदारक है जब आपका बच्चा आपसे पूछे कि क्या वह बिना पत्थरबाज़ों के हमले के डर के अपने घर लौट पाएगा।

सोनम महाजन का इशारा कश्मीरी पण्डितों के लगभग तीस साल पुराने नरसंहार की ओर था, जिसके बाद कश्मीर के लगभग सभी हिन्दुओं और सिखों को जान बचाने के लिए घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

क्या था खुर्रम का ट्वीट और क्या मिला जवाब

किसका दोष, कौन रक्षक

इसे सीधे-सीधे ओछापन तो नहीं कह सकते पर यह दुर्भाग्यपूर्ण अवश्य है कि खुर्रम परवेज़ अपने बेटे का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रहे हैं। अगर आप अपनी राजनीति में अपने परिवार का इस्तेमाल ढाल के तौर पर करेंगे तो आप अपने विरोधियों को उस ढाल पर प्रहार करने के लिए दोष नहीं दे सकते।

और अगर उन्हें किसी को अपने बेटे के ‘डर’ के लिए दोष देना ही है तो उन कश्मीरी दहशतगर्दों को दें जो इसी ताक में बैठे हैं कि यहाँ कश्मीर आज़ाद हो, वहाँ हिन्दुओं का या तो जबरन धर्मांतरण कर दिया जाए या क़त्ल कर दिया जाए। अपने बेटे के ‘डर’ का किसी को दोष देना ही है तो उन सैयद अली गिलानी को दें जो खुल कर यह कहते हैं कि कश्मीर उनके और उनके प्यारे कश्मीरियों के लिए राजनीतिक नहीं, मज़हबी मुद्दा है।

और अगर उन्हें इन ताकतों के खिलाफ़ मुँह खोलने में अपने बेटे की ‘mob-lynching’ हो जाने का डर है तो ज़रा जा के उसी सेना से एक बार सुरक्षा की गुहार लगाएँ। भारतीय सेना के ‘काफ़िर’ वीर सदियों से अपनी जान की कुर्बानी दे कर भी शरणार्थी को अभय प्रदान करते आए हैं।

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