Friday, June 21, 2024
Homeसोशल ट्रेंड'200 करोड़ मुस्लिमों की जीत': FIFA में मोरक्को की जीत पर 'उम्माह' के साथ...

‘200 करोड़ मुस्लिमों की जीत’: FIFA में मोरक्को की जीत पर ‘उम्माह’ के साथ भारत के एक मुख्यमंत्री, मेसी को ‘बकरी’ बना किया था रोस्ट

उमर अब्दुल्ला 'मोरक्को वो हो (खुशी दर्शाने वाले शब्द)' कहकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं और दूसरे ट्वीट में वो फुटबॉल जगत के लीजेंड माने जाने वाले रोनाल्डो की खिल्ली उड़ाते हुए एक ट्वीट रीट्वीट करते हैं। इसमें दिखाया जाता है कि कैसे बाहरी देश रोनाल्डो को महान समझते हैं और इस्लामी देश के सामने वह कुछ भी रह जाते।

कतर में हुए फीफा वर्ल्ड कप (Qatar Fifa World Cup) में पुर्तगाल के साथ हुए मैच में मोरक्को (1-0) के जीतते ही सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय का अलग ही रुख देखने को मिला। अब तक जहाँ लोग अपनी पसंदीदा टीम या उसके खिलाड़ियों के प्रदर्शन की चर्चा मैच खत्म होने के बाद करते थे। वहीं इस बार मोरक्को के जीतने पर बातें उम्माह की होती नजर आईं। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला भी इस भीड़ का हिस्सा थे जिन्होंने पूरे फीफा के वक्त दो बार ट्वीट किया, वो भी सिर्फ इस्लामी देश की जीत से संबंधित।

देख सकते हैं कि एक ट्वीट में उमर अब्दुल्ला ‘मोरक्को वो हो (खुशी दर्शाने वाले शब्द)’ कहकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं और दूसरे ट्वीट में वो फुटबॉल जगत के लीजेंड माने जाने वाले मेसी की खिल्ली उड़ाते हुए एक ट्वीट रीट्वीट करते हैं। इसमें दिखाया जाता है कि कैसे बाहरी देश मेसी को महान समझते हैं और इस्लामी देश के सामने वह कुछ भी रह जाते। इस संदेश को देने के लिए एक जिंदा बकरी और एक रोस्ट होते मटन की तस्वीर को शेयर किया गया है। उनके इन दोनों ट्वीट से साफ पता चलता है कि उनके लिए फीफा में क्या जरूरी था। अगर वो खेल और खिलाड़ी को इज्जत देना जानते तो मेसी जैसे खिलाड़ी का मजाक नहीं उड़ाते।

मालूम हो कि केवल उमर अब्दुल्ला अकेले नहीं है जिन्हें मोरक्को की जीत से इतनी खुशी हुई हो। ऐसे तमाम मुस्लिम है जो एक मुस्लिम देश के फीफा में मैच जीतने पर फूल रहे हैं। 2014 में वर्ल्ड कप के विजेता रहे इस्तानबुल के फुटबॉलर मेसुत ओजिल मोरक्को की जीत को सबसे दुनिया के हर मुस्लिम की जीत से जोड़ते हैं और कहते हैं,”गर्व हो रहा है। क्या टीम है! मुस्लिम जगत के लिए क्या उपलब्धि है। अच्छा लग रहा है यह देखकर कि आधुनिक फुटबॉल के समय में भी कहानियाँ सच होती हैं। इससे कई लोगों को ताकत और उम्मीद मिलेगी।”

भारत के बारे में फर्जी न्यूज फैलाने वाले खालेद बेदौन ने कहा, “मोरक्को एक मुस्लिम देश है। वहाँ 98 फीसद लोग इस्लाम को मानते हैं। खिलाड़ियों ने भी गोल और जीत के बाद इबादत की है। ये जीत विश्व भर के 2 बिलियन मुस्लिमों की है।”

कुछ यूजर ये भी लिखते हैं कि उन्हें रोनाल्डो पसंद है और वह विश्वास नहीं कर पा रहे कि उन्होंने अपने जीवन में एक भी वर्ल्ड कप नहीं जीता। मगर साथ ही उन्हें मोरक्को की जीत की खुशी है। उन्हें उम्माह का समर्थन मिला है। देख सकते हैं कि कैसे मोरक्को की जीत से ज्यादा उम्माह की बातें ट्वीट में हो रखी हैं और शायद यही वजह है कि उमर अब्दुल्ला भी मोरक्को की जीत पर इतना खुश हुए।

विवादों में रहा कतर का फीफा

बता दें कि इस बार कतर में हुआ फीफा वर्ल्ड कप कई विवादों का हिस्सा रहा। पहले तो खबर आई कि वहाँ पर इस्लामी मजहब का प्रचार-प्रसार गैर-मुस्लिम टूरिस्टों में किया जा रहा है। फिर पता चला कि वहाँ रेनबो रंग वाले कलाई बंध बाँधने से यूरोपियन खिलाड़ियों को मना कर दिया गया है और पत्रकारों को भी इस बैंड को पहनकर मैच नहीं देखने दे दिया जा रहा।

इसी तरह मैच को एक बीयर कंपनी द्वारा स्पान्सर किया गया लेकिन कतर ने स्टेडियम में बीयर की बिक्री पर रोक लगा दी। सब कुछ इस्लामी मुल्क ने इस्लाम को देखने हुए किया और जब इस खेल में मोरक्को की जीत हुई तो यह भी खबर आई कि फ्रांच में दंगे हुए हैं, पुलिस पर पत्थरबाजी हुई है, सड़कों पर ईंट-पत्थर फेंके गए हैं।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बिहार का 65% आरक्षण खारिज लेकिन तमिलनाडु में 69% जारी: इस दक्षिणी राज्य में क्यों नहीं लागू होता सुप्रीम कोर्ट का 50% वाला फैसला

जहाँ बिहार के 65% आरक्षण को कोर्ट ने समाप्त कर दिया है, वहीं तमिलनाडु में पिछले तीन दशकों से लगातार 69% आरक्षण दिया जा रहा है।

हज के लिए सऊदी अरब गए 90+ भारतीयों की मौत, अब तक 1000+ लोगों की भीषण गर्मी ले चुकी है जान: मिस्र के सबसे...

मृतकों में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इस साल मृतकों की संख्या बढ़कर 1081 तक पहुँच चुकी है, जो अभी बढ़ सकती है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -