Monday, March 8, 2021
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ईद पर मटन ठीक, क्रिसमस पर ‘गोमूत्र नहीं शराब पियो’, पर महाशिवरात्रि पर निकल रहा है लेखिका का ज्ञान

दोहरा रवैया वाले ये वामपंथी कभी भी क्रिसमस पर ये नहीं कहते कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है या हानिकारक। इसी तरह ये ईद के मौके पर लाखों पशुओं की हत्या को लेकर भी अपना रोना नहीं दिखाते। लेकिन, अपने प्राचीन धर्म-ग्रंथों का अनुसरण करते हुए जब हिन्दू हज़ारों वर्षों की परंपरा का निर्वहन करते हैं, तो.....

ख़ुद को लेखिका बताने वाली रुचि कोकचा ने महाशिवरात्रि को लेकर ‘ज्ञान देने’ वाली परंपरा निभाई। यहाँ ज्ञान से वेद-पुराणों का तात्पर्य नहीं है बलि हिन्दुओं को उलटी-सीधी सलाह देने वाली बात है। होली पर पानी बचाने, जन्माष्टमी पर हाँडी की ऊँचाई कम रखने और दीपावली पर पटाखे न जलाने की सलाह देना वामपंथियों का फेवरिट शौक हैं। इसी तरह महाशिवरात्रि पर दूध बचाने, शिवलिंग की जगह ग़रीबों को चढाने और भगवान शिव क्या चाहते हैं- ये सब वही लोग बताते हैं, जिन्हें ये तक नहीं पता कि भगवान शिव के बारे में हमारे धर्म-ग्रंथों में क्या लिखा हुआ है। इसी तरह ‘ऑब्सेस्ड’ नामक पुस्तक की लेखिका रुचि ने भी उटपटांग सलाह दी।

रुचि ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में भगवान शिव एक बच्चे को दूध पिला रहे होते हैं और लोग लाइन में लग कर मंदिर में शिवलिंग पर दूध चढ़ा रहे होते हैं। रुचि ने साथ ही लिखा कि समझने वाले समझ जाएँगे। हालाँकि, ये सब वामपंथियों के फ़र्ज़ी ज्ञान की उपज होती है क्योंकि ऐसा कहीं कुछ भी वर्णित नहीं है। रुचि इस तस्वीर के माध्यम से ये बताना चाहती थी कि हिन्दू मंदिर में शिवलिंग पर दूध अर्पित कर के उसे ‘बर्बाद’ करते हैं और भगवान शिव ‘नहीं चाहते’ कि उन्हें कोई दूध चढ़ाए क्योंकि वो ग़रीबों को लेकर चिंतित हैं।

जबकि, हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि भगवान शिव को फल-फूल, जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किया जाना चाहिए। लेकिन वामपंथी चाहते हैं कि हिन्दू अपने प्राचीन ग्रंथों व परम्पराओं को नहीं, बल्कि उनके हिसाब से चलें। रुचि भले ही महाशिवरात्रि पर ज्ञान बाँचती हों, वो ईद और क्रिसमस पर गुलछर्रे उड़ाने का एक भी मौका नहीं छोड़तीं। ईद मुस्लिमों का त्यौहार है जबकि क्रिसमस ईसाईयों का, इसीलिए उस समय रुचि ख़ासा एन्जॉय करती हैं और सारा ज्ञान हिन्दू त्योहारों के लिए बचा के रखती हैं। ईद और क्रिसमस पर खुशियाँ मनाती हुई उनकी तस्वीरों को देख कर ये स्पष्ट हो जाता है।

अगस्त 2018 में ईद के मौके पर रुचि ने मुबारकबाद देते हुए लिखा कि सभी को मटन-बिरयानी खानी चाहिए, युद्ध जैसे हालात नहीं क्रिएट करने चाहिए। हालाँकि, उन्होंने मटन के लिए बकरों को मारे जाने पर कोई ज्ञान नहीं दिया। इस दौरान उन्होंने पशु अधिकार की बातें नहीं की और न ही मुस्लिमों को जीवहत्या न करने की सलाह दी क्योंकि ये सारे सलाह हिन्दुओं के लिए बचा कर रखे जाते हैं। इसी तरह सितम्बर 2017 में भी ईद के मौके पर रुचि ने मटन-बियानी खाई थी।

ईद पर कोई ज्ञान या सलाह नहीं देती रुचि: ख़ूब एन्जॉय करती हैं

वहीं ईसाईयों के त्यौहार क्रिसमस के मौके पर 25 से भी अधिक ट्वीट्स करने वाली रुचि महाशिवरात्रि पर लोगों को उलटे-पुलटे सलाह देती हैं। रुचि ने क्रिसमस 2015 के मौके पर ‘भक्तों’ को ‘गोमूत्र की जगह’ वाइन पीने की सलाह दी थी। इस दौरान वो सांता की मीठी-मीठी बातें करती हैं और अपनी तस्वीरें क्लिक कर-कर के लोगों को दिखाती हैं।

क्रिसमस पर ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता जबकि हिन्दू त्योहारों पर नाराज़ रहती हैं रुचि

दोहरा रवैया वाले ये वामपंथी कभी भी क्रिसमस पर ये नहीं कहते कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है या हानिकारक। इसी तरह ये ईद के मौके पर लाखों पशुओं की हत्या को लेकर भी अपना रोना नहीं दिखाते। लेकिन, अपने प्राचीन धर्म-ग्रंथों का अनुसरण करते हुए जब हिन्दू हज़ारों वर्षों की परंपरा का निर्वहन करते हैं, इन्हें परेशानी हो उठती है। छोटी-छोटी चीजों को बड़ा बना कर पेश किया जाता है और ऐसा दिखाया जाता है जैसे कि मुस्लिमों व ईसाईयों के त्यौहार प्यार के लिए होते हैं जबकि हिन्दू पर्व-त्योहारों से सिर्फ़ घृणा फैलती है। ये अलग बात है कि रुचि जैसों के बयानों में अब कोई रुचि नहीं दिखाता।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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