Friday, July 19, 2024
Homeसोशल ट्रेंड'आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक है ये, चंदा खा जाती है': राना अयूब को...

‘आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक है ये, चंदा खा जाती है’: राना अयूब को सऊदी वाले लगातार दे रहे डोज पर डोज, कहा – ‘काबा हमारा है’

"राना अयूब अब खुलेआम आतंकियों का समर्थन कर रही हैं। हूती विद्रोहियों ने दो भारतीय नागरिकों को मार दिया, लेकिन इस पर वो चुप हैं। हूती, अलकायदा या ISIS में कोई अंतर नहीं है।"

तथाकथित पत्रकार राना अयूब यमन और सऊदी अरब को लेकर किए गए ट्वीट के बाद बुरी फँसी हैं। आतंकवादियों के समर्थन का आरोप लगा कर सऊदी अरब वाले निशाना साध रहे हैं, लेकिन इसके लिए भी वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही दोषी ठहरा रही हैं। राना अयूब ने लिखा था कि यमन को सऊदी अरब तबाह कर रहा है, जबकि सच्चाई ये है कि यमन सरकार के निवेदन पर सऊदी अरब वहाँ कार्रवाई कर रहा है। राना अयूब ने इस बात पर शर्म जताया था कि मक्का-मदीना का नियंत्रण सऊदी अरब के पास है।

अब सऊदी अरब और भारत के लोग मिल कर उन पर निशाना साध रहे हैं। मेजर (रिटायर्ड) माणिक एम जॉली ने लिखा, “राणा अयूब ने एक कूटनीतिक मुद्दे में टाँग अड़ाया, जिस समस्या की उन्हें समझ नहीं थी। ISI ने उनका इस्तेमाल ईरान-पाकिस्तान-तुर्की के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया, ताकि वो सऊदी अरब-अमेरिका और आंशिक रूप से इजरायल पर भी निशाना साध सकें। ये रोजमर्रा के घृणा फैलाने से कहीं अधिक बढ़ कर है। ये एक बड़ा लीग हैं।”

सऊदी अरब के दिखने वाले एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “गैर-अरबी मुस्लिम ये समझते हैं कि केवल मुस्लिम होने के कारण उन्हें काबा के नियंत्रण का अधिकार है। लेकिन, इसे हमारे महान पूर्वज इस्माइल ने बनवाया था। जबकि मदीना हमारे कबीलों की भूमि रही है। एक सऊदी के मुस्लिम होने के नाते मैं कह सकता हूँ कि आपके विचार की कोई अहमियत नहीं है।” एक अन्य हैंडल ने लिखा, “राना अयूब अब खुलेआम आतंकियों का समर्थन कर रही हैं। हूती विद्रोहियों ने दो भारतीय नागरिकों को मार दिया, लेकिन इस पर वो चुप हैं। हूती, अलकायदा या ISIS में कोई अंतर नहीं है।”

एक अन्य सऊदी अरब के व्यक्ति ने लिखा कि मुस्लिम होने के नाते वो ये देख कर परेशान है कि राना अयूब ईरान समर्थित उस गुट का समर्थन कर रही हैं, जिन्होंने इराक, सीरिया, लेबनान और यमन से लाखों मुस्लिमों को पलायन के लिए मजबूर किया। ‘TFI’ के संपादक त्रिभुवन ने लिखा कि राना अयूब ये भूल गई थीं कि सऊदी अरब में भारत की तरह सहिष्णुता नहीं है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें समझ में आ गया होगा कि ‘असहिष्णुता’ का मतलब क्या होता है।

कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ हसन सजवानी ने कहा कि राना अयूब जैसे लोग सबसे बड़े दोषी हैं। उन्होंने लिखा कि खुद को ‘मानवतावादी आवाज़’ बता कर ऐसे लोग हमेशा हूती, हमास, और ISIS से जुड़े समूहों का समर्थन करते हैं। उन्होंने भी याद दिलाया कि कैसे हूती आतंकियों ने अबूधाबी एयरपोर्ट पर दो निर्दोष सिखों की हत्या कर दी। सऊदी अरब के एक अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने राना अयूब पर सामाजिक कार्यों के नाम पर चंदा जुटा कर पचा जाने का आरोप लगाया।

राना अयूब ने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि वो 2022 में हज करने जाना चाहती हैं। अब जब एक सोशल मीडिया यूजर ने तंज कसा कि राना अयूब का हज कोटा रद्द कर दिया गया है, तो उन्होंने उन्हें ‘संघी’ बता दिया। वहीं हसन सजवानी ने ये भी लिखा कि राना अयूब सऊदी को ‘खून का प्यासा’ बता रही हैं, जबकि हूती आतंकियों के कुकृत्यों पर चुप रहती हैं। उन्होंने राना अयूब को आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक करार दिया। कइयों ने उन्हें ‘झूठी’ बताया। सऊदी वालों ने कहा कि हमारे पवित्र स्थलों को लेकर उन्हें ज्ञान नहीं चाहिए।

बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच युद्ध चल रहा है। यूनाइटेड अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी पर भी हूतियों ने कई बैलिस्टिक मिसाइल छोड़े हैं। सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों की सीमा यमन से मिलती है, जहाँ खासी अशांति है। UAE के एक F16 मिसाइल को भी तबाह कर दिया गया। इससे ‘रेड सी शिपिंग रूट’ को भी खतरा पैदा हो गया है। यमन में 2014 से ही गृह युद्ध चल रहा है, जब हुतियों ने सना नाम के इलाके पर कब्ज़ा कर के सऊदी अरब को इसमें हस्तक्षेप के लिए मजबूर किया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जहाँ सब हैं भोले के भक्त, बोल बम की सेवा जहाँ सबका धर्म… वहाँ अस्पृश्यता की राजनीति मत ठूँसिए नकवी साब!

मुख्तार अब्बास नकवी ने लिखा कि आस्था का सम्मान होना ही चाहिए,पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए।

अजमेर दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ मामले की जाँच में लापरवाही! कई खामियाँ आईं सामने: कॉन्ग्रेस सरकार ने कराई थी जाँच, खादिम...

सर तन से जुदा नारे लगाने के मामले में अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती की जाँच में लापरवाही को लेकर कोर्ट ने इंगित किया है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -