उत्तर प्रदेश के वृंदावन में 28 फरवरी 2026 से 2 मार्च 2026 तक संतों का एक भव्य कार्यक्रम ‘शताब्दी आनंद महोत्सव’ का आयोजन हुआ। इस आध्यात्मिक समागम में देश भर से साधु-संत और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए भाषणों की दो क्लिप सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रही हैं।
पहली क्लिप सामाजिक कार्यकर्ता काजल हिंदुस्तानी की है और दूसरी क्लिप विख्यात प्रखर वक्ता ‘दीदी माँ’ साध्वी ऋतंभरा की है। इन दोनों के बयानों को लेकर इंटरनेट पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। आईए इस बहस की वजह इन्हीं के बयानों से समझते हैं।
काजल हिंदुस्तानी का संबोधन और UGC का मुद्दा
कार्यक्रम में काजल हिंदुस्तानी ने जब मंच संभाला तो अपना पहले संतों का अभिवादन किया और उसके बाद राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने धर्म की बात करते हुए प्रभु श्रीराम में अपनी आस्था प्रकट की। इसके बाद उन्होंने मंच से यूजीसी का मुद्दा छेड़ा। लोग सोशल मीडिया पर उनके वक्तव्य के इसी हिस्से को शेयर कर रहे हैं।
इसमें वह कहती सुनाई पड़ती हैं, “हम हिंदू समाज को एक करने की बात करते हैं, लेकिन फिर एक राजा आता है और गलत फैसला लेकर यूजीसी (UGC) जैसा काला कानून ले आता है, जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और सेवक को बाँटने का काम करता है। यह अधर्म है।”
काजल कहती हैं,
“मैं नहीं जानती कि धर्म क्या है और अधर्म क्या है, मैं तो उस धर्म और अधर्म को मानती हूँ जो भगवान कृष्ण ने गीता में बहुत सरल भाषा में सिखाया है। इसलिए यह अधर्म है। जब अर्जुन ने भगवान से कहा कि मैं द्रोणाचार्य को कैसे मार सकता हूँ, वे मेरे गुरु हैं, मैं अपने भाइयों को कैसे मार सकता हूँ, वे सब मेरे भाई हैं और मैं अपने भीष्म पितामह को कैसे मार सकता हूँ, वे मेरे पितामह हैं। तब भगवान कृष्ण ने उत्तर दिया। भगवान कृष्ण ने कहा कि जिस द्रोणाचार्य को तुम अपना गुरु कह रहे हो, जब उनकी अपनी संतान अधर्म कर रही है और वे उन्हें नहीं रोक रहे हैं, तो वे भी अधर्मी हैं। जिस भीष्म पितामह को तुम अपना पितामह कह रहे हो, उस भीष्म पितामह ने तब अपनी आँखें बंद कर ली थीं जब तुम्हारा भाई दुर्योधन जाँघा ठोकर कहता था द्रौपदी को कि आ मेरी जाँघा पर बैठ और वो चुप था। भगवान ने अर्जुन से कहा कि वे सभी अधर्मी हैं, और जो अधर्म पर मौन रहते हैं और केवल उन्हें देखते रहते हैं, चाहे वह द्रोण हों, भीष्म हों या कर्ण, वे सभी मारे जाते हैं। वे सभी मारे जाएँगे। अगर यूजीसी जैसा काला कानून है और अगर हम चुप हैं, तो हम भी अधर्मी हैं।”
उन्होंने कहा, “हमें जातियों में क्यों बाँटा गया है? कोई भी संत जातियों में नहीं बँटा है। ब्राह्मणों को पहले ही बदनाम किया जा चुका है। कॉलेजों में नारे लगते हैं कि ‘ब्राह्मणों तेरी कब्र खुदेगी’, ब्राह्मणों की कब्र क्यों खुदेगी? ‘तिलक, तराजू और तलवार’ को मारने की बात होती है, क्यों मारें उन्हें? नारे लगते हैं कि ‘ब्राह्मण भारत छोड़ो’, ‘तुम्हारा खून बहेगा’, खून क्यों बहेगा? हमें यह सब कौन बाँट रहा है?”
काजल ने जाति के आधार पर होने वाले विभाजन को लेकर सवाल उठाते हुए न केवल ब्राह्मणों के खिलाफ हुई नारेबाजी की आलोचना की बल्किन कॉलेजों में छात्र राजनीति का विरोध किया। उन्होंने श्रोताओं से प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का प्रस्ताव रखा, नेताओं से नाराजगी जाहिर की और हिंदू समाज की एकता पर बोलते हुए संदेश दिया कि यूजीसी कानून जैसे कानूनों को थोपना हिंदुओं को बाँटने का प्रयास है।
यह है हमारी पूरी स्पीच जिसमे हमने संत समाज के त्याग और पराक्रम तथा बलिदान को महत्व दिया है ना की कोई पोलिटिकल पार्टी के नेता को,
— Kajal HINDUsthani (@kajal_jaihind) March 11, 2026
जब “दलित हिंदू समाज” के साथ अन्नाय होता है तो उनके राइट्स के लिए हमने सदैव निःस्वार्थ भाव से कार्य किया है,
जब “आदिवासी हिंदू समाज” के साथ अन्नाय… pic.twitter.com/8pIHXpIHjo
साध्वी ऋतंभरा का मंच से दिया गया बयान
काजल हिंदुस्तानी का ये वक्तव्य वायरल होने के बाद एक वीडियो साध्वी ऋतंभरा (दीदी माँ) की भी सामने आई है। उन्होंने जब मंच संभाला तो और समाज को एकजुट रहने की सीख दी। वीडियो में उन्हें कहते सुन सकते हैं, “इतने अपमानों के बाद हम इस स्थिति तक पहुँचे हैं, ऐसे में यदि आप सत्ता में बैठे नेतृत्व पर संदेह करेंगे, तो सत्य का विनाश हो जाएगा। अपनों के प्रति गुस्सा मंचों पर नहीं, बल्कि घर में व्यक्त किया जाता है। घर के गंदे कपड़े सड़क पर नहीं धोए जाते।”
साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू समाज से एक ‘दानव’ को पहचानने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने ‘विमर्श’ या ‘नैरेटिव’ का नाम दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य पूर्व में बैठे विदेशी तत्वों द्वारा भारत के भीतर जाति व्यवस्था का ऐसा जाल बुना गया है कि भाई-बहनों के सिर कट रहे हैं और साजिशें रची जा रही हैं।
साध्वी ऋतंभरा ने आगे कहा कि यदि हम आपस में बँट गए, तो हिंदू चेतना को कैसे बचा पाएँगे? उन्होंने हरिजन, स्वर्ण और पिछड़ों के रिश्तों को तोड़ने वाली साजिशों को धूल में मिलाने का आह्वान किया। साध्वी ने देवदासी और सती जैसे शब्दों के साथ जुड़े ऐतिहासिक बलिदानों का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह सनातन संस्कृति को अपमानित करने के लिए विमर्श गढ़े गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कुछ भी हमें मिला है, वह वर्षों के अपमान को सहने के बाद मिला है, इसलिए हमें आंतरिक मतभेदों को भुलाकर हिंदू समाज को एक सूत्र में पिरोना होगा।
UGC का खुला विरोध करने वाले हिन्दुओ सुनिए पूजनीय साध्वी ऋतंभरा जी को शताब्दी आनंद महोत्सव में पूजनीय साध्वी जी काजल हिंदुस्तानी के कृत्य की वजह से परेशान हो गई थी😥काजल हिंदुस्तानी ने इस मंच का गलत इस्तेमाल किया नेता बनने के चक्कर मे pic.twitter.com/vRuRoi7tW5
— मोहित गुप्ता (@GuptaMohit1978) March 10, 2026
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग: समर्थन और विरोध के स्वर
इन बयानों के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर नेटीजन्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कुछ लोग हैं जो दोनों के वक्तव्यों को अपनी-अपनी जगह पर सही बता रहे हैं। वहीं कुछ को काजल हिंदुस्तानी के बयान में राजनीति दिख रही है और कुछ साध्वी ऋतंभरा की प्रतिक्रिया से असहमत होने के चलते उनके लिए अमर्यादित शब्द इस्तेमाल करने पर उतर आए हैं।
ऐसे में काजल ने तो अपने पूरे वक्तव्य को साझा करके कह दिया है कि उन्होंने राजनीति नहीं की, वो समय-समय पर हर वर्ग की आवाज बनी हैं। लेकिन साध्वी ऋतंभरा को अब जातिगत आधार पर निशाना बनाते हुए अपमानित किया जा रहा है।
हिंदू समाज और धर्म के लिए दिए गए उनके योगदान को दरकिनार करते हुए उनके चरित्र और मंशा पर अपमानजनक शब्दों से प्रहार हो रहा है। शायद ऐसे लोग भूल गए हैं कि साध्वी ऋतंभरा ही वो चेहरा थीं जिन्होंने 1990 के दशक में विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा संचालित ‘श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन’ में अहम भूमिका निभाते हुए सारे भारत में धर्म जागरण किया।
उन्होंने इस आंदोलन के लिए हिन्दू समाज की विभिन्न जातियों को एकता के सूत्र में बाँधा। इसी एकात्म हुई हिन्दू शक्ति ने इस आंदोलन की सफलता के रूप में अपने आराध्य श्री रामलला की जन्मभूमि पर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण का सम्पूर्ण न्यायालयीन अधिकार प्राप्त किया। फिलहाल साध्वी ऋतंभरा श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में वात्सल्य ग्राम चलाती हैं। वात्सल्य ग्राम की पूरी परिकल्पना के माध्यम से वे भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की सकारात्मकता पर जनमानस का ध्यान आकर्षित कर उसका प्रसार करने का सम्पूर्ण प्रयास कर रही हैं।


