Wednesday, September 28, 2022

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‘समय काटने का जरिया बन गया है अदालत को कोसना’: अजीत भारती के खिलाफ चलेगा कोर्ट की अवमानना का मामला, AG ने दी सहमति

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ 'अदालत के अवमानना' के आरोप में आपराधिक मामला चलाने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

बंगाल चुनाव ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा जब जवानों को मरवा रही है तो आम लोगों को क्या छोड़ेगी- बंगाल के मुस्लिम युवा

हमने पाया कि युवाओं का मूलत: ये मानना है कि यहाँ पर शांति व्याप्त है। कहीं पर भी कोई हिंसा नहीं हो रही है और यदि कहीं हिंसा हो भी रही है तो उसमें भाजपा का हाथ है। वो अपनी राजनीति चमकाने के लिए हिंसा कर रहे हैं।

आखिर आम आदमी को इस बजट से क्या मिल गया? Just usual promises or realistic vision?

ऑपइंडिया ने बजट को सरल भाषा में समझने के लिए के लिए SRCC (दिल्ली विश्वविद्यालय) के Dept of Economics में सहायक प्रोफेसर अभिनव प्रकाश से बात की।

S02E09: क्या बकैत को पता था लाल किला और दंगों का?

बकैत के पोस्ट और प्राइम टाइम से पता चलता है कि उसे मालूम था कि किसान क्या करने वाले हैं!

Video: ‘किसान’ नेता स्वतंत्र क्यों घूम रहे हैं? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं?

सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?

मीलॉर्ड! आज खुश तो बहुत होंगे आप: ऑपइंडिया एडिटर के चंद सवाल

शायद अब सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि औरों के भी संवैधानिक अधिकार हैं, लिब्रांडू मीडिया गिरोह इसे सफल आंदोलन करार देगा, जबकि पुलिस पर तलवारों से हमले हुए हैं!

गणतंत्र दिवस पर लिब्रांडुओं के नैरेटिव के लिए आप तैयार हैं?

कल की मीडिया में वामपंथियों और लिब्रांडुओं के नैरेटिव की झलक आज देख लीजिए ताकि आपको झटका न लगे!

तांडव: घृणा बेचो, माफी माँगो, सरकार के लिए सब चंगा सी!

यह डर आवश्यक है, क्रिएटिव फ्रीडम कभी भी ऑफेंसिव नहीं होता, क्योंकि वो सस्ता तरीका है। अभी तक चल रहा था, तो क्या आजीवन चलने देते रहें?

मोदी सरकार निकम्मों की तरह क्यों देख रही है किसान आंदोलन को?

किसान आंदोलन को ले कर मोदी सरकार का रवैया ढीला, हल्का और निकम्मों जैसा क्यों दिख रहा है? मोदी की क्या मजबूरी है आखिर?

राम मंदिर के लिए दान दीजिए, लोगों को प्रेरित कीजिए

राम मंदिर की अहमियत नए मंदिर से नहीं, बल्कि पाँच सौ साल पहले टूटे मंदिर से समझिए, जब हमारे पूर्वज ग्लानि से डूबे होंगे। आपका सहयोग, उनको तर्पण देने जैसा है।

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