सड़कों के मामले में कॉन्ग्रेसी सरकारों का रिकॉर्ड संदेह ही पैदा करता है। वादे के लालू की तरह छलावा साबित होने की आशंका ज्यादा है। मध्य प्रदेश में जब दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में 10 साल कॉन्ग्रेस सत्ता में रही थी तो सड़क और गड्ढों का फर्क मिट गया था।
आज कॉन्ग्रेस 'न्याय योजना' को लेकर बनर्जी का गुणगान करते नहीं थक रही। लेकिन, इंदिरा के जमाने में 250 लड़कियों सहित क़रीब 700 छात्र गिरफ्तार किए गए थे। अभिजीत बनर्जी पर 'हत्या की कोशिश' के आरोप लगाए गए थे।
अमित शाह ने विपक्ष के इन आरोपों को लेकर इनकार किया कि केंद्र सरकार चुनाव के समय गड़े मुर्दे उखाड़ रही है। उन्होंने पूछा कि पी चिदंबरम मामले के समय कौन सा चुनाव था? साथ ही उन्होंने पूछा कि जब अगस्ता-वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर मामले में कार्रवाई की गई, तब कौन सा चुनाव था?
क्या किसी पार्टी का पूर्व अध्यक्ष और सर्वेसर्वा ऐसा कह सकता है कि उसकी पार्टी ने कुछ नहीं किया? राहुल गाँधी कह सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि जनता ने अब बहुत देख लिया है और पिछले 70 सालों में कुछ नहीं हुआ।
चुनाव के दौरान राहुल गॉंधी ने अडानी को एक रुपए प्रति मीटर की दर से 35 हजार एकड़ जमीन देने का आरोप मोदी पर लगाया था। अब उन्हीं अडानी को लुभाने के जतन में कॉन्ग्रेस सरकार लगी है।
साल 2019 के विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस ने गत वर्ष के विधानसभा चुनावों में भी राजस्थान और मध्यप्रदेश की जनता से कई तरह के वादे किए थे। लेकिन नतीजा आज सबके सामने हैं। किसान अब भी ऋण माफी की गुहार लगा रहे हैं और महिलाएँ अब भी वहाँ असुरक्षित हैं।
संदीप दीक्षित ने पीसी चाको को नोटिस भेजकर माँग की है कि शीला को दिए गए मानसिक उत्पीड़न के लिए चाको माफी माँगे वरना वे कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
"मुझे इन छापेमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं मालूम आयकर विभाग के लोग कहाँ छापेमारी को अंजाम दे रहे हैं। उन्हें कर लेने दीजिए। मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है, अगर हमारी तरफ से कोई गलती है तो हम इसे सुधारेंगे।"
खुर्शीद ने सोनिया के अंतरिम अध्यक्ष बनने पर नाखुशी जताते हुए कहा था कि पार्टी को करारी हार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल के इस्तीफे के कारण पार्टी जनादेश का विश्लेषण नहीं कर पाई। इससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।
"राफेल एयरक्राफ्ट पर 'ॐ' लिख कर और शस्त्र-पूजा कर के राजनाथ सिंह इसे धर्म के साथ जोड़ रहे हैं। यह औरों की तरह सिर्फ एक हथियार है, जिसे आप ख़रीद रहे हैं। दशहरा के त्योहार और राफेल का भला क्या मेल है?"