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350 को बुलाया, आए सिर्फ 40… बहुत नाइंसाफी: प्रियंका गाँधी के ‘स्टाइल’ से परेशान UP के कॉन्ग्रेसी नेता?

UP कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेताओं को लगता है कि UPCC से इन्हें दरकिनार कर दिया गया है। साथ ही पार्टी के इन पुराने निष्ठावान नेताओं पर नए नेतृत्व (प्रियंका गाँधी और उनके आस-पास के नेता) अपनी मर्जी की चीजें थोप देते हैं।

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी को दोबारा से खड़ा करने का प्लान बनाने वाली पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी इन दिनों अपनी ही पार्टी के पुराने नेताओं का विरोध झेल रही हैं। दरअसल, हाल ही में एक बैठक के लिए प्रियंका गाँधी की ओर से पार्टी के 350 पूर्व सांसद, विधायक, एमएलसी, 2019 के लोकसभा उम्मीदवार और 2017 के विधानसभा उम्मीदवारों को बुलावा भेजा गया था। लेकिन इंदिरा गाँधी की छवि वाली प्रियंका के बुलावे के बावजूद आए कितने? सिर्फ 40! मतलब 350 में से सिर्फ 40… बहुत नाइंसाफी हो गया ये तो!

कहाँ तो प्रियंका गाँधी को भारतीय राजनीति की दूसरी इंदिरा कह कर प्रोजेक्ट किया जा रहा था, और कहाँ वो कार्यकर्ता तो छोड़िए, कॉन्ग्रेस के नाम पर टिकट मिल चुके, जीत चुके नेताओं का नेता बनने तक का क्षमता प्रदर्शन करने में चूक रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की शैलवी शारदा की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के पुराने कॉन्ग्रेसी नेताओं ने पिछले 15 दिनों में दो बैठकें की हैं। यह बैठकें इसलिए हुईं क्योंकि इन नेताओं को लगता है कि UPCC (उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी) से इन्हें दरकिनार कर दिया गया है। साथ ही पार्टी के इन पुराने निष्ठावान नेताओं पर नए नेतृत्व (प्रियंका गाँधी और उनके आस-पास के नेता) अपनी मर्जी की चीजें थोप देते हैं।

इस संबंध में पहली मीटिंग नवंबर के पहले हफ्ते में पार्टी नेता सिराज मेहंदी के आवास पर हुई। मेहंदी ने अक्टूबर में सोनिया गाँधी को यह कहकर अपना इस्तीफा दिया था कि नई टीम में एक भी शिया नहीं है। दूसरी मीटिंग पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर आयोजित की गई। इस मीटिंग में तो हद हो गई थी। एक नेता ने प्रियंका वाड्रा की ओर इशारा करते हुए यहाँ तक कह दिया था कि कॉन्ग्रेस कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है।

अब ताजा जानकारी के मुताबिक इस संबंध में तीसरी बैठक भी जल्दी ही पूर्व विधायक रंजन सिंह सोलंकी के निवास स्थान नोएडा में होने वाली है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सोनिया गाँधी से मिलने के लिए प्रतिनिधि मंडल का चुनाव इसी मीटिंग में किया जाना है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस महासचिव को अपनी नीतियों के कारण अपने पार्टी नेताओं का प्रत्यक्ष विरोध झेलना पड़ रहा है। वहीं, वे पार्टी में पड़ी फूट को सुलझाने की बजाए सत्ताधारी पार्टी पर हमला बोलने में जुटी हुई हैं। अभी बीते दिनों उन्नाव के किसान की एक वायरल वीडियो को शेयर कर प्रियंका ने केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया था। उन्होंने वीडियो में नजर आ रहे किसान को ‘अधमरा’ बताया था, लेकिन उन्नाव पुलिस द्वारा पूरी वीडियो शेयर करने के बाद पता चला था कि वो किसान अधमरा नहीं था बल्कि अपनी जिद में वहीं पड़ा था और पुलिस के हटाने के बावजूद भी नहीं हट रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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