"मैं सुरक्षित हूँ। मैं एनसीपी के निशान पर चुनाव जीतकर आया हूँ, इसलिए पार्टी बदलने का कोई सवाल ही नहीं है। शरद पवार और अजित पवार जो भी फ़ैसला लेंगे मैं उसके साथ हूँ। किसी भी अफ़वाह पर विश्वास न करें।”
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हट गया और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार एनसीपी के एक धड़े के साथ भाजपा से जा मिले और डिप्टी सीएम बने। कब, क्या और कैसे हुआ, पल-पल की कहानी।
''अजित पवार के साथ गए आठ विधायकों में से पाँच वापस आ गए हैं। उनसे भी झूठ बोला गया और इस तरह कार में बैठाया गया जैसे किसी को अगवा किया जाता है। अगर हिम्मत है तो विधानसभा में बहुमत साबित करके दिखाएँ।''
महाराष्ट्र की राजनीति ने आज कइयों को हँसने का मौका दिया। राज्य में बदले राजनीतिक समीकरण के कारण ट्विटर पर कई चुटकुलों और मीम ने अपनी जगह बनाई, जमकर शेयर किए गए।
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने साफ़ कर दिया है कि यह निर्णय किसी राजनेता का नहीं बल्कि गृह मंत्रालय का है और नियमानुसार ही हुआ है। नड्डा ने कहा कि किसी भी नेता के 'थ्रेट परसेप्शन' को देखते हुए मंत्रालय तय प्रोटोकॉल के तहत निर्णय लेता है।
48 वर्षीय छबर के शेख पाँच दिन पहले कूच बिहार में काम करने गए थे, लेकिन उसके बाद से घर वापस नहीं लौटे। घर न लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। काफ़ी ढूँढ़ने के बाद जब उनका कुछ नहीं पता चला, तो उनके परिजनों ने तूफ़ानगंज थाने में लिखित शिक़ायत दर्ज करवाई।
गडकरी का यह बयान शिवसेना विधायक दल में बगावत की खबरों के बीच आया है। हालॉंकि शिवसेना का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाने के लिए उसने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।
कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड को प्रोपेगेंडा किए बगैर चैन नहीं पड़ रहा। उसने खबर यह फैलाई कि सुबह की अज़ान और डेसीबल स्तर के बारे में आया फैसला लागू नहीं किया गया, अतः महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश से संबंधित फैसला भी लागू नहीं होना चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर किसी भी दल के पास सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या है तो उसे सीधे राज्यपाल से संपर्क करना चाहिए, राज्यपाल ने किसी भी दल को सरकार बनाने से मना नहीं किया है।