Homeदेश-समाजTMC के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता को फाँसी पर लटकाया: 1 पाँच दिनों से...

TMC के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता को फाँसी पर लटकाया: 1 पाँच दिनों से ग़ायब, लिबरल मौन?

अपने ट्वीट में भाजपा ने सवाल करते हुए लिखा कि TMC के पश्चिम बंगाल में इन क्रूर राजनीतिक हत्याओं पर लिबरल्स अब तक चुप क्यों हैं? अगर यह भाजपा शासित राज्य होता तो क्या वे तब भी इतने चुप रहते?

पश्चिम बंगाल से आए दिन राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। एक बार फिर भाजपा ने सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर अपने एक कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगाया है। बंगाल भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट के अनुसार राज्य के पश्चिम मेदिनीपुर ज़िले में भाजपा के आदिवासी कार्यकर्ता बरसा हांसदा की लाश मिली है। भाजपा का आरोप है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हांसदा की हत्या की है।

पश्चिम मेदिनीपुर के एक आदिवासी भाजपा कार्यकर्ता बरसा हांसदा को TMC के गुंडों ने फाँसी पर लटका दिया।

अपने ट्वीट में भाजपा ने सवाल करते हुए लिखा कि TMC के पश्चिम बंगाल में इन क्रूर राजनीतिक हत्याओं पर लिबरल्स अब तक चुप क्यों हैं? अगर यह भाजपा शासित राज्य होता तो क्या वे तब भी इतने चुप रहते?

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के कूच बिहार ज़िले के तूफ़ानगंज में पाँच दिन से एक भाजपा कार्यकर्ता ग़ायब है। इस मामले  में भाजपा ने विरोधियों पर राजनैतिक षणयंत्र रचने का आरोप लगाया है। ग़ायब कार्यकर्ता का नाम छबर शेख है और वो पेशे से एक कारपेंटर है। छबर के ग़ायब होने की लिखित शिक़ायत तूफ़ानगंज थाने में दर्ज है।

ख़बर के अनुसार, 48 वर्षीय छबर पाँच दिन पहले कूच बिहार में काम करने गए थे, लेकिन उसके बाद से घर वापस नहीं लौटे। घर न लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। काफ़ी ढूँढ़ने के बाद जब उनका कुछ नहीं पता चला, तो उनके परिजनों ने तूफ़ानगंज थाने में लिखित शिक़ायत दर्ज करवाई।

इस मामले पर कूचबिहार के अल्पसंख्यक मोर्चे के भाजपा नेता एनामुल हक़ ने बताया कि लोकसभा चुनाव के बाद हमारे एक कार्यकर्ता आनंद पाल की हत्या हो गई थी। उसकी हत्या की गुत्थी पुलिस अब तक नहीं सुलझा पाई है। आज फिर से हमारा एक कार्यकर्ता पिछले पाँच दिन से ग़ायब है। पुलिस थाने में लिखित शिक़ायत भी कर दी गई है। यह पूरी तरह से एक राजनीतिक साज़िश है और अगर 2-3 दिन में हमारे लापता भाजपा कार्यकर्ता को अगर नहीं ढूँढा गया तो अल्पसंख्यक मोर्चा मारूगंज ग्राम पंचायत इलाक़े में और बड़ा आंदोलन करेगी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -