महज 35 किलोमीटर दूर स्थित दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के अपने-अपने सचिवालय और बजट हैं। एक जिले वाले दादरा-नगर हवेली और दो जिलों वाले दमन-दीव के विलय से प्रशासनिक खर्चों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
"पीएम मोदी की वर्तमान सरकार को भारत में 'हिंदू राज (शासन) स्थापित करने का अधिकार' है और यदि भारतीय राजनेता असदुद्दीन ओवैसी और उनके जैसे अन्य को भारत पसंद नहीं है, तो उन्हें पाकिस्तान चले आना चाहिए।"
"मेरे दस्तावेज़ों को 2000 में मेरी माँ द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने भारत में कई वर्षों तक मेरी परवरिश एकल माँ के रूप में की। मेरे माता-पिता की शादी नहीं हुई थी। कोई भी सभ्य सरकार जो प्रतिशोध नहीं लेना चाहती थी, वो आगे आ सकती थी और लापता दस्तावेज़ों या किसी विसंगति के बारे में स्पष्टीकरण माँग सकती थी।"
"चूँकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि श्री रामलला एक निर्विवाद मंदिर है, इसलिए उसका शिखर भी मंदिर का था, न कि किसी मस्जिद का गुंबद, तो अनजाने में मंदिर के शिखर को तोड़ने वाले कारसेवकों पर चल रहे बाबरी मस्जिद के गुंबद तोड़ने वाले केस को अविलम्ब सरकार द्वारा समाप्त किया जाए।"
अलग-अलग बयानों में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि विवादों को पीछे छोड़कर अब देश के आगे बढ़ने का वक्त है।
देश में चुनाव व्यवस्था में शुचिता, पारदर्शिता लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। भारत में चुनाव व्यवस्था में जब-जब सुधार की बात की जाएगी, तब-तब शेषन को याद किया जाएगा।
सर्वोच्च अदालत का ये फैसला हमारे लिए एक नया सवेरा लेकर आया है।
इस विवाद का भले ही कई पीढ़ियों पर असर पड़ा हो, लेकिन इस फैसले के बाद हमें ये संकल्प करना होगा कि अब नई पीढ़ी, नए सिरे से न्यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी।
पीएम मोदी ने कहा, “करतारपुर में ही उन्होंने प्रकृति के गुणों का गायन किया था। उन्होंने कहा था- “पवणु गुरु, पाणी पिता, माता धरति महतु”!!! यानि हवा को गुरु मानो, पानी को पिता और धरती को माता के बराबर महत्व दो।”
एक लेखक और पत्रकार है - आतिश तासीर। इसे ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस मिला हुआ था। लेकिन अब यह रद्द कर दिया गया है। कारण है - भारतीय गृह मंत्रालय से यह जानकारी छुपाना कि उसके पिता पाकिस्तानी मूल के थे।
अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने सभी सांसदों (NDA) और मंत्रियों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहने को कहा है। इसके साथ ही जैसे-जैसे फैसले की घड़ी नज़दीक आ रही हैं वैसे-वैसे कानून व्यवस्था कायम रखने वाली एजेंसियाँ पूरी तरह से मुस्तैद हो रही हैं।