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CJI, PM मोदी ने किया साफ़: अब काशी, मथुरा सहित किसी धार्मिक स्थल पर विवाद के लिए तैयार नहीं है देश

फैसला सुनाते हुए जस्टिस गोगोई ने 1991 के पूजा स्थल कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संसद का यह कानून साफ करता है कि 15 अगस्त 1947 के दिन तक जिस भी पूजा स्थल की जो भी स्थिति है, उसमें कोई धार्मिक बदलाव की इजाजत नहीं हैं। इसलिए इन मामलों से जुड़े सभी मुकदमें अब खत्म माने जाएँगे।

अयोध्या फैसले में 9 नवंबर को कोर्ट ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया और इसके बाद न्यायपालिका, सरकार एवं RSS जैसे संगठन सब एक मत देते नजर आए। दरअसल, अलग-अलग बयानों में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि विवादों को पीछे छोड़कर अब देश के आगे बढ़ने का वक्त है। जिसके बाद ऐसा मानकर चला जा रहा है कि भविष्य में सांप्रदायिक धार्मिक स्थलों के नामपर विवाद होने की गुंजाइश कम है। फिर चाहे मामला मथुरा-काशी से संबंधित ही क्यों न हो।

जानकारी के लिए बता दें कि अयोध्या की तरह काशी के विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और मथुरा में भी मस्जिद विवाद सालों से चल रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र करते हुए साफ कर दिया है कि काशी और मथुरा के संदर्भ में यथास्थिति बरकरार रहेगी।

शनिवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस गोगोई ने 1991 के पूजा स्थल कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संसद का यह कानून साफ करता है कि 15 अगस्त 1947 के दिन तक जिस भी पूजा स्थल की जो भी स्थिति है, उसमें कोई धार्मिक बदलाव की इजाजत नहीं हैं। इसलिए इन मामलों से जुड़े सभी मुकदमें अब खत्म माने जाएँगे। उल्लेखनीय है कि इस कानून से सिर्फ़ राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद को ही छूट थी। जिसका मतलब साफ है कि कोर्ट अब ऐसे किसी भी मुद्दे को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को संबोधित करते हुए उसी दिन कहा कि अब देश में कटुता के लिए स्थान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब नए भारत के निर्माण में सबको जुटना है। इस दौरान उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दिन का संदेश जोड़ने का है, जुड़ने का है और मिलकर जीने का है। सभी कटुता को तिलांजलि देने का वक्त है। नए भारत में कटुता, नकारात्मकता पर कोई स्थान नहीं होगा।

वहीं संघ संचालक ने भी अपने बयान में इस मामले से आरएसएस के जुड़ने को एक अपवाद बताया। उन्होंने कहा है कि संघ आंदोलन नहीं करता, राम मंदिर से जुड़ना केवल अपवाद था। जिससे साफ होता है कि संघ किसी और पूजा स्थल के लिए होने वाले आंदोलन से जुड़ने पर विचार नहीं कर रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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