पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जम्मू कश्मीर का मसला उठाया है। भारत द्वारा इस सम्बन्ध में उसे उसी मंच पर जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान इस मामले में यूएनएचआरसी की अर्जेन्ट बैठक बुलाना चाहता है। लेकिन......
हक्कानी ने कहा कि भारत या भारतीयों की खिल्ली उड़ाने, उन्हें गालियाँ देने, उनका अपमान करने या फिर उन्हें बदनाम करने की जगह पर पाकिस्तानियों को अपने देश के बारे में सोचना चाहिए। वे अभी वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं।
रबी पीरज़ादा पहले भी अजीबोगरीब व्यवहार के कारण सुर्ख़ियों में रही हैं। इससे पहले जब पाक पीएम ने महिलाओं को मुर्गीपालन कर रुपए कमाने की सलाह दी थी, तब पीरज़ादा ने कई मुर्गियाँ ख़रीद कर अपने घर में रखा था और वीडियो भी पोस्ट किया था।
ये वही मंत्री हैं, जिन्हें मोदी का नाम लेते ही करंट लगा था। उन्होंने पहले कहा था कि फ़ौज ने अपनी तैयारियों के बारे में घोषणा करने के लिए उन्हें रखा हुआ है। अब वह एटम बम का साइज बता रहे हैं।
लंदन में अंडे खा चुके शेख रशीद ऐसे बयान देते ही रहते हैं जिससे उनका मजाक बने। उनका दावा है कि फ़ौज ने अपनी तैयारियों पर बयान देने के उन्हें रखा हुआ है। आधिकारिक रूप से यह काम आसिफ गफूर का है जो आजकल बॉलीवुड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
"जब सेना की तारीफ होती है तो वे सबूत माँगने लगते हैं। मोदी का विरोध करने में पाकिस्तान की तारीफ़ करने लगते हैं। ऐसे गद्दारों के लिए एक नया कानून होना चाहिए, चाहे वे JNU में पढ़ रहे हों, या महाराष्ट्र में हों। उसके बाद कोई नसीरुद्दीन, हामिद अंसारी या सिद्धू नहीं होगा।"
शेखी बघारते हुए शेख रशीद ने एक सेमिनार में दावा किया कि वे हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता देख रहे हैं और अपनी कौम को तैयार करने (सेमिनार में ) आए हैं। उन्होंने धमकी भी दी कि पाकिस्तानी सेना के पास जो हथियार हैं, वे दिखाने के लिए नहीं, इस्तेमाल करने के लिए हैं।
भारतीय सिंधु जल आयोग के आयुक्त पीके सक्सेना ने कहा कि हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1989 में पहली बार हुए और सालाना तौर पर नवीनीकृत होने वाले इस बाबत समझौते को हिंदुस्तान ने और आगे न बढ़ाने का निश्चय किया है।
"पाकिस्तानी सेना अभी कश्मीर मसले पर भारत से युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। सुस्त होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महँगाई का आम आदमी के जीवन पर त्रासद असर पड़ा है।"- ये शब्द किसी भारतीय नेता या अधिकारी के नहीं हैं। ये बयान है पाकिस्तान की सैन्य वैज्ञानिक आयशा सिद्दीका के।