'Zee News' ने दावा किया है कि उसके पास वो कॉल रिकार्ड्स हैं, जिसके आधार पर पता चलता है कि आरोपित संदीप और पीड़ित परिवार के बीच घंटों बातचीत होती थी। पीड़ित परिवार ने नकारा।
द वायर के 'मनगढ़ंत' अध्ययन में बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया के ट्रेंड्स का पिछले तीन महीने में विश्लेषण किया ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अफवाहों को कैसे बढ़ाते हैं।
"एक सच्चे पत्रकार को कॉल टैपिंग से कभी डर नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पत्रकार "लीक" से डरता है तो इसका मतलब है कि वह कुछ छिपा रहा है या नहीं चाहता कि सच्चाई सामने आए।"