सुरेश ने बताया कि उनके पिता मूल रूप से पड़ोसी जिले गोंडा के रहने वाले थे। अयोध्या में वो कमाने के लिए बसे थे। यहाँ वो एक ईंट-भट्ठे पर मुंशी का काम करते थे।
"भारतीयों को अब तय करना है कि वह कैसा राष्ट्र बनाना चाहते हैं। क्या उन्हें हिंदू राष्ट्र चाहिए या फिर समावेशी और स्थिर धर्मनिरपेक्ष देश चाहिए। लोगों को तय करना होगा कि उन्हें तानाशाह चाहिए या फिर लोकसेवक।"