हिन्दू 'बीरबल की खिचड़ी' के उस ब्राह्मण की तरह है जो तुम्हारे शाही किले में जलते दीपक की लौ से भी ऊष्मा पाता है। हिन्दू को बस इससे मतलब है कि उसके आराध्य का मंदिर बन रहा है। लेकिन सवाल यह है, हे सत्ताधीश! कि क्या तुम्हें हिन्दुओं से कुछ मतलब है?
चारो आरोपितों की पहचान मुश्ताक अहमद, उसके भाई सिराज अहमद, अनीश और इश्तिहार के रूप में हुई है जिन्होंने राहुल को एक पेड़ से बाँधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई।
पेट्रोल बम, एके-47, मानव बम और अत्याधुनिक हथियारों के बरअक्स एक स्वयंसेवक की लाठी यकीनन नाकाफी है, भले उसके मन में पहाड़ों सा साहस है लेकिन व्यवहारवाद यही कहता है कि बंदूक के आगे लाठी काम नहीं आती।