Monday, September 26, 2022

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Book Review

महाराष्ट्र के छोटे से गाँव से लेकर लंदन तक, वीर सावरकर ने कैसे खड़ी की क्रांतिदूतों की विशाल सेना: पुनः राष्ट्रवाद की अलख जगाती...

'मित्रमेला' वीर सावरकर के द्वारा बनाया गया संगठन था, जो कि विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक व देशभक्ति से संबंधित आयोजन करता था। कई क्रांतिदूत इससे जुड़े।

मरते हुए पल्लव राजा के दो अधूरे स्वप्न.. पुल्लालूर में भव्य मंदिर… अंग्रेजों-मुगलों नहीं, 7वीं शताब्दी में वातापी के युद्ध पर अरुण कृष्णन की...

बात ये है कि वामपंथी इतिहासकारों और उपन्यास लेखकों ने कभी भारतीय इतिहास को छुआ ही नहीं। अंग्रेजों और मुगलों का गुणगान करते हुए दशकों काट दिए।

अरब को जीतने वाले बप्पा रावल से लेकर औरंगजेब को हराने वाले राज सिंह तक: ओमेंद्र रत्नू की पुस्तक में हजार वर्षों का इतिहास,...

ओमेंद्र रत्नू ने 'Maharanas: A Thousand Year War For Dharma' पुस्तक लिख कर हिन्दू धर्म व राष्ट्र के लिए सराहनीय कार्य किया है। हिंदी में भी है उपलब्ध।

स्वतंत्रता सेनानियों के गुप्त प्रवास की एक गाथा, कैसे जुटाए अर्थ और अस्त्र : क्यों पढ़नी चाहिए ‘क्रांतिदूत’ की झाँसी फाइल्स

काकोरी कांड के बाद जिस तरह अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की तलाश में कुत्तों की तरह घूम रही है। ऐसे में इनका सुरक्षित और गुप्त रहना ज़रूरी था।

सलमान खुर्शीद की ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ पर बैन से दिल्ली HC का इनकार, कहा- ‘जरूरी नहीं कि इसे पढ़ें ही’

दिल्ली हाईकोर्ट ने सलमान खुर्शीद की विवादित पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या' पर रोक लगाने की याचिका ख़ारिज कर दी है

अमेज़न पर आउट ऑफ स्टॉक हुई राहुल रौशन की किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’

राहुल रौशन ने हिंदुत्व को एक विचारधारा के रूप में क्यों विश्लेषित किया है? यह विश्लेषण करते हुए 'संघी' बनने की अपनी पेचीदा यात्रा को उन्होंने साझा किया है- अपनी किताब 'संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा' में…"

क्या विभाजन की विचारधारा आज भी जिन्दा है: अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच बातचीत

संजय दीक्षित की पुस्तक 'Nullifying article 370 and enacting CAA' पर अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच भारत में रह रहे कथित अल्पसंख्यकों के विभाजन की विचारधारा पर बातचीत हुई।

90 के हिन्दू नरसंहार से एयर स्ट्राइक, प्रेम, कौम और राजनीति तक, ‘बाला सेक्टर’ में सब दर्ज हैं

'बाला सेक्टर' उसी 1990 के भयानक रक्तपात से शुरू होती है। जेहादियों के दल ने अपने ही रक्षक को कैसे मौत के घाट उतारा.. ये सब आपको पहले ही खण्ड में मिल जाएगा।

मैं मुन्ना हूँ: कहानी उस बच्चे की जो कभी अंधेरी कोठरी में दाखिल होकर अपनी आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया...

उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी आरंभ होती है उसके श्रापित बचपन से जहाँ वह शारीरिक, मानसिक झंझावतों से जूझता किशोरवय के अल्हड़पन को पार कर प्रेम की अनकही गुत्थियों को सुलझाता जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहा।

मैं मुन्ना हूँ: उपन्यास पर मसान फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा ने स्कैच के जरिए रखी अपनी कहानी

मसान और आँखों देखी फिल्मों के प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा, जो राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त निर्माता निर्देशक हैं, ने 'मैं मुन्ना हूँ' उपन्यास को लेकर एक स्केच बना कर ट्विटर किया है।

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