वहीं जानकारी मिली है कि सिया को कुछ लोगों से धमकियाँ मिल रही थीं। इसे लेकर वह बेहद परेशान थीं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
वामपंथियों और उनके गिरोह को ये बात नहीं भूलना चाहिए कि जिस कानून-व्यवस्था में उन्हें यकीन नहीं है, आज उसी ने उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी। ये चीज वामपंथियों को याद रखना चाहिए।
दिल्ली दंगों में चार्जशीट दाखिल होने का सिलसिला शुरू होते ही 'मासूम' नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें भी शुरू हो गई है। जानिए, मोनिका अरोड़ा से कैसे रची गई थी पूरी साजिश।
द क्विंट ने डीएस बिंद्रा नाम के उस आरोपित को बचाने की कोशिश की है, जिसके लिए चार्जशीट में कहा गया है कि उसने उन दंगों को भड़काने का काम किया, जिसमें कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान गई थी।