DMK के घोषणापत्र में एक तरफ जहाँ लोक-लुभावन घोषणाओं की झड़ी लगाकर वोटरों को साधने की कोशिश की गई है, तो वहीं दूसरी तरफ पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे को रिहा कराने का वादा भी किया गया है।
यह सोचने वाली बात है कि एक राजनीतिक पार्टी, जिसके नेताओं पर राजीव गाँधी हत्या का आरोप है, उस पार्टी के नेताओं से अपने जन्मदिन की सुबह सबसे पहले मिलकर सोनिया गाँधी क्या संकेत देना चाहती हैं?