Saturday, July 24, 2021

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लिबरलों ने ‘RSS’ को बताया तालिबान से प्रेरित: भड़के मुस्लिम कट्टरपंथी, लगाया आतंकी जिहादी समूह को बदनाम करने का आरोप

पत्रकार रोहित सरदाना की मौत पर खुशी मनाने वाले भारत के लिबरल, 'दक्षिणपंथी संघियों' पर दानिश सिद्दीकी की छवि खराब करने का आरोप लगा रहे हैं।

NASA के ट्वीट पर आई प्रतिक्रियाएँ विज्ञान के प्रति समर्थन नहीं, हिंदुत्व के प्रति घृणा दर्शाती हैं

NASA इंटर्न प्रतिमा राय और हिन्दू देवी-देवताओं पर आई प्रतिक्रिया यह उजागर करती है कि विरोधियों का सरोकार विज्ञान के समर्थन में नहीं है।

HESH और SHIM: जावेद अख्तर ने अंग्रेजी में बनाए 2 शब्द, लिंग को लेकर सोशल मीडिया पर हो गए ट्रोल

'वोक समाज' जावेद अख्तर के इस लैंगिक समानता के विचार को ठुकरा देगा, क्योंकि 'hesh' में 'he' सर्वनाम और 'shim' में 'him' शामिल है।

लिबरलों की नज़र में आज-कल, दिन भी अँधेरी रात है… क्योंकि मोदी ने छीने सामूहिक शर्मिंदगी के वे दिन

खुद शर्मिंदा होने के बहाने समाज को शर्मिंदा होने के लिए ललकारना। अपराध की बात करते हुए नक्सली को डिफेंड करोगे तो समाज तुम्हारे ऊपर चढ़ जाएगा और तुम्हें सच में शर्मिंदा करके छोड़ेगा।

जैसे-जैसे फूटा लेफ्ट-कॉन्ग्रेस-इस्लामी इकोसिस्टम का बुलबुला, वैसे-वैसे बढ़ता गया ‘जय श्रीराम’ पर प्रोपेगेंडा 

कम्युनिस्ट-कॉन्ग्रेस-मीडिया-बुद्धिजीवियों के गठबंधन को पहली चोट जय श्रीराम से ही लगी थी। मोदी के उदय ने इसे और गहरा कर दिया।

3 कॉन्ग्रेसी, 2 प्रोपेगंडा पत्रकार: जुबैर के अलावा इन 5 पर भी यूपी में FIR, ‘जय श्रीराम’ पर फैलाया था झूठ

डॉक्टर शमा मोहम्मद कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। सबा नकवी खुद को राजनीतिक विश्लेषक बताती हैं। राना अयूब को 'वाशिंगटन पोस्ट' ने ग्लोबल एडिटर बना रखा है। कॉन्ग्रेसी मशकूर अहमद AMU छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। पीएम मोदी के माता-पिता पर टिप्पणी कर चुके सलमान निजामी जम्मू कश्मीर के कॉन्ग्रेस नेता हैं।

श्रीराम मंदिर के लिए सदियों तक मुगलों से सैकड़ों लड़ाई लड़े तो कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-आप इकोसिस्टम से एक और सही

जो कुछ भी शुरू किया गया है वह हवन कुंड में हड्डी डालने जैसा है पर सदियों से लड़ी गई सैकड़ों लड़ाई के साथ एक लड़ाई और सही।

संघी महिलाएँ हॉट, चेहरा ढँक कर करो ‘हेट’ सेक्स,: लिबरलों की सोच वायरल, समलैंगिक बता महिला पत्रकार ने किया बचाव

इस कन्वर्सेशन में 8000 लोग शामिल थे, जिसमें 'संघियों को लेकर अपनी फैंटसी और उनके साथ 'हेट सेक्स' की चाहत को लेकर बातें की गईं।'

मैं चाहे जो लिखूँ-बोलूँ, मेरी मर्जी: बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार, आरफा खानुम महज झाँकी है

औरंगज़ेब ने भले दर्जनों मंदिर तुड़वाए, लेकिन इतिहासकार चाहे तो अपने इतिहास की कार चढ़ा उसे कुचल दे और साबित कर दे कि वह तो बड़ा शालीन शासक था।

वे डफली अच्छी बजाते हैं, Placard अच्छी लिखते हैं, लेकिन मस्जिद के रेपिस्ट मौलवी पर बोलने की मनाही है

कठुआ में एक रेप हुआ था तो पूरे भारत को तुम लोगों ने रेपिस्तान बताया था। तुम्हें तो याद होगा ही? तुम्हारी ही यूनिवर्सिटी के लोग बॉलीवुड वालों के साथ खुद के हिन्दू होने पर शर्मिंदा हुए थे?

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