Tuesday, October 19, 2021

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Massacre

‘किसान विद्रोह’, ‘मालगाड़ी में नरसंहार’, पर्यटन सर्किट: मालाबार में मोपला मुस्लिमों ने हिंदुओं का किया था कत्लेआम, लीपापोती कर रही केरल सरकार

मोपला मुस्लिमों द्वारा मालाबार में किए गए हिंदू नरसंहार को 2021 में 100 वर्ष हो गए हैं। ऐसे में केरल सरकार इन प्रयासों में जुटी है कि कैसे भी इसका जिक्र धो पोंछ कर बराबर हो।

जब मोपला में हुआ हिंदुओं का नरसंहार, तब गाँधी पढ़ा रहे थे खिलाफत का पाठ; बिना प्रतिकार मरने की दे रहे थे सीख

नरसंहार के बावजूद, भारतीय नेतृत्व जिसमें प्रमुख रूप से गाँधी शामिल थे, उसने हिंदुओं को उनके चेहरे पर मुस्कान के साथ मरते रहने के लिए कहा।

वो रात जब 6 साल की ‘अम्मा’ को भागना पड़ा, घर पर आज भी मुस्लिमों का कब्जा: मोपला हिंदू नरसंहार की एक कहानी यह...

स्मिता राजन ने बताया है कि कैसे मोपला हिंदू नरसंहार के दौरान उनकी नानी कल्याणीकुट्टी को अपने घर से भागना पड़ा था।

‘काफिरों! तुम्हारा अंत अब ज्यादा दूर नहीं…’: जरा याद उन हिंदुओं को भी कर लो जिनका कत्लेआम डायरेक्ट एक्शन डे के नाम

डायरेक्ट एक्शन डे, एक अलग देश के लिए कम, हिन्दू नरसंहार के लिए आतुर मुस्लिम कट्टरपंथियों के मन में सुलग रही मजहबी इच्छा का दिन था।

सेनारी नरसंहार में सबको बरी करने के फैसले की सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, 34 लोगों की गला रेत और पेट चीर कर दी गई...

सेनारी नरसंहार पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए बिहार की नीतीश सरकार ने जो याचिका दाखिल की थी उसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

जब मार डाले गए 10000 हिंदू, पहचान के लिए उनकी संपत्तियों पर लिखा गया ‘H’: मजहबी पहचान बता ‘सेफ’ थे मुस्लिम और ईसाई

मुस्लिम और ईसाई अपने मजहबी प्रतीकों का उपयोग रक्षा के लिए कर रहे थे। जबकि हिंदुओं की पहचान के लिए अभियान चला। पीले रंग से बड़े अक्षरों में उनकी संपत्तियों पर ‘H’ लिखा गया।

अँधेरे में गॉंव में घुसे 500-600, घर से घसीटकर लाए गए ग्रामीण, 34 का गला काटा-पेट चीरा: 22 साल बाद कोई दोषी नहीं

हाई कोर्ट ने 13 दोषियों को रिहा कर दिया है। लिहाजा सवाल उठता है कि फिर सेनारी नरसंहार को अंजाम किसने दिया?

यह जोगेंद्रनाथ का आँगन है, यहीं 60 लोगों को लाइन में खड़ा कर मारी थी गोली… नीवा, काली, रानी आज भी उन जख्मों संग...

6 नावों पर बैठकर 150 पाकिस्तानी आए। जोगेंद्रनाथ पाल के आँगन में 60 पुरुषों को खड़ा किया... मुक्ति से पहले बांग्लादेश में बर्बरता की एक कहानी।

खून पर खून और खून के बदले खून: बिहार में जातीय नरसंहार के बूते लालू ने कुछ यूँ खड़ी की थी ‘सामाजिक न्याय’ की...

अगस्त 12-13, 1992 का दिन। गया जिला का बारा गाँव। माओवादियों ने इलाके को घेरा और 'भूमिहार' जाति के 35 लोग घर से निकाले गए। पास में एक नहर के पास ले जाकर उनके हाथ बाँधे गए और सबका गला रेत कर मार डाला गया। लालू राज में जाति के नाम पर ऐसी न जाने कितनी घटनाएँ हुईं।

कहानी खूनी मिंजर की: संप्रदाय विशेष के स्थानीय लोगों ने आतंकियों को दी थी शरण… और चम्बा में मार डाले गए थे 35 हिन्दू

कहानी हिमाचल के चम्बा में हुए हिन्दुओं के नरसंहार की। आतंकियों ने जैसे ही गरीब हिन्दू मजदूरों को सोते हुए देखा, फायरिंग शुरू कर दी।

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