Wednesday, June 16, 2021

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सूना पड़ा प्रोपेगेंडा का फिल्मी टेम्पलेट! या खुदा शर्मिंदा होने का एक अदद मौका तो दे 

कितने प्यारे दिन थे जब हर दस-पंद्रह दिन में एक बार शर्मिंदा हो लेते थे। जब मन कहता नारे लगा लेते। धमकी दे लेते थे कि टुकड़े होकर रहेंगे, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह।

शुक्र है PM मोदी हैं! पब्लिक की होगी फ्री वैक्सीनेशन, प्रोपेगेंडा के नए टीके की तलाश में विपक्ष

केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर जिस तरह से क्रेडिट लेने और देने की होड़ मची हुई है, वह दर्शाता है कि ऐसे निर्णयों को या ऐसी घोषणा का विपक्ष या मोदी विरोधियों के लिए क्या महत्व है।

मैं चाहे जो लिखूँ-बोलूँ, मेरी मर्जी: बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार, आरफा खानुम महज झाँकी है

औरंगज़ेब ने भले दर्जनों मंदिर तुड़वाए, लेकिन इतिहासकार चाहे तो अपने इतिहास की कार चढ़ा उसे कुचल दे और साबित कर दे कि वह तो बड़ा शालीन शासक था।

इंदिरा गाँधी के ‘गुरु’ चाहते थे गिरा दी जाए संसद, ‘नई संसद अंधविश्वास का नतीजा’ से पहले भी आई थी एक थ्योरी

सेंट्रल विस्टा पर प्रोपेगेंडा के बीच एक तथ्य यह भी है कि कभी अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर मोटे अक्षरों में संसद को गिरा देने का वादा किया गया था।

अब किस कठघरे में होगा सेंट्रल विस्टा… क्योंकि प्रोपेगेंडा ही उनकी फितरत

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी सेंट्रल विस्टा पर टूलकिटी प्रोपेगेंडा बंद होगा, इसकी संभावना कम है।

PM मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया गिरोह और उसका प्रोपेगेंडा: कभी ‘डिवाइडर इन चीफ’ तो कभी Covid के ‘एकमात्र जिम्मेदार’

मीडिया गिरोह और भारत के राष्ट्रवादी लोगों का युद्ध बहुत आगे तक चलने वाला है। इस युद्ध में इतना तो निश्चित है कि मीडिया, हिंदुओं और भारत के हितों पर जोरदार प्रहार करने वाला है और उसके सामने खड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनका समर्थन करने वाले करोड़ों हिन्दू।

‘हेनरी’ लड़की छेड़ता था, इसलिए वामपंथियों ने उसे ‘हरि’ बना दिया: NCERT की किताबों से हिंदू घृणा की खेती, बच्चे शिकार

सवाल यह है कि ये चीजें कब बदलेंगी? बच्चों को उनकी किस्मत के भरोसा छोड़ा जाना एक गैर जिम्मेदाराना काम होगा।

प्रोपेगेंडा का यह पाप भारी: टूलकिट से पल्ला झाड़ना कॉन्ग्रेस के लिए मुमकिन नहीं, इकोसिस्टम से बाहर नहीं चलेगा ‘फेक’ वाला जुमला

इस टूलकिट को बनाने वाले और उसके क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी लेने वाले देसी हैं, कॉन्ग्रेस के लिए इससे खुद को अलग कर पाना लगभग असंभव होगा।

चीनी वायरस पर मोदी घृणा से सना लेफ्ट-लिबरल प्रोपेगेंडा: कोरोना से भी घातक है ये राजनीति

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसे-जैसे तेज होती गई इसके समानांतर एक और लहर भी उफान मारने लगी। यह लहर संक्रमण से भी घातक है।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

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