पहले कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने महाभारत की 'द्रौपदी' पर गलत तथ्य प्रस्तुत कर उनकी छवि को बिगाड़ा। पोल खुली तो वामपंथी पैटर्न पर चलते हुए सनातनी विद्वान को ही ब्लॉक कर दिया।
नोएडा की सोसाइटी में मंदिर निर्माण की माँग पर प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम ने 'मस्जिद कार्ड' और 'RSS-BJP' एंगल घुसाकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।