विषय: Rajiv Gandhi

भोपाल गैस त्रासदी

15274 मौतें, एंडरसन, शहरयार… सुषमा स्वराज ने जब राहुल गाँधी से कहा- अपनी ममा से पूछें डैडी ने…

सन् 1984। ऑपरेशन ब्लू स्टार का साल। इंदिरा गॉंधी की हत्या का साल। सिखों के नरसंहार का साल। सबसे प्रचंड बहुमत से केंद्र में सरकार बनने का साल। एक शहर के कब्रिस्तान में बदल जाने का भी साल। वो शहर है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल। 2-3 दिसंबर 1984 की रात यहॉं यूनियन कार्बाइड नामक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट नामक जहरीले गैस का रिसाव हुआ। सुबह हुई तो शहर के एक हिस्से में लाशों का ढेर लगा था। यह शायद इतिहास की सबसे भयानक मानव निर्मित त्रासदी है। लेकिन, उससे...
राम मंदिर, राजीव गाँधी

कार सेवक नहीं थे राजीव: शाहबानो से पीछा छुड़ाने को राम मंदिर आंदोलन में डाला था हाथ

कॉन्ग्रेस कहती है कि वह धार्मिक भावनाओं को तवज्जो नहीं देती। फिर क्या कारण था कि अचानक राजीव गॉंधी हिंदू जनभावना के रथ पर सवार होने को बेचैन हो उठे? इसके लिए वे देवरहा बाबा के पास हाजिरी देने से भी पीछे नहीं हटे।

‘नेपाल से हिंदू राजशाही उखाड़ने का राजीव गॉंधी ने बनाया प्लान, माओवादियों से की थी मिन्नतें’

ऑपरेशन ख़त्म होते ही जीवनाथन गायब हो गए। उन्होंने अपने अंतर्गत कार्य कर रहे लोगों से साफ़ कह दिया कि वे ऐसा समझें कि कोई जीवनाथन था ही नहीं। नेपाल के कई नेता जीवनाथन को खोजते हुए भटक रहे थे लेकिन जीवनाथन तो कोई था ही नहीं।
राजीव गाँधी

राजीव गाँधी को ‘आधुनिक भारत के पिता’ के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल करेंगी राजस्थान और MP की सरकारें

अगर भाजपा ने किसी स्वतंत्रता सेनानी या किसी महापुरुष को लेकर ऐसा निर्णय लिया होता तो कई लोग बवाल खड़ा करते हुए कहते कि सरकार पाठ्यक्रम से छेड़छाड़ कर रही है या उसका भगवाकरण कर रही है।
राजीव गाँधी

सचिवालय में पॉर्न वीडियो चला, क्या आपने राजीव गाँधी को शुक्रिया कहा?

कभी दिल्ली के राजीव चौक पर हो जाता है, तो कभी राजस्थान के सचिवालय में हो जाता है, कभी-कभी तो संसद में भी चल पड़ा था। लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि एक बार गलती से चला दो और दूसरी बार जाँच करने के लिए। हालाँकि, जो भी हुआ उसमें डिजिटल इंडिया और दैनिक सस्ते इंटरनेट की छाप तो है ही, चाहे गोदी मीडिया कितना भी छुपाने की कोशिश करे।
कॉन्ग्रेस

राजीव गाँधी मरते समय PM थे, सीताराम केसरी अध्यक्ष नहीं: कॉन्ग्रेस अपनी वेबसाइट से फैला रही फेक न्यूज़

कॉन्ग्रेस पार्टी परिवार की मुराद में इतना डूब गई है कि इतिहास को भी बदलने पर आमादा है। राजीव गाँधी को पार्टी की वेबसाइट पर मरते समय भारत का तत्कालीन प्रधानमंत्री बताया गया है जबकि सच्चाई यह है कि उस समय भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हुआ करते थे। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को...
राजीव गाँधी

सोनिया, प्रियंका किस हैसियत से हत्यारों को माफ कर रही हैं? 20 अन्य लोगों की जान की कीमत क्या?

जब-जब राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ़ करने की बात सामने आती है, तो उन 20 लोगों को क्यों भुला दिया जाता है जिनके नाम के आगे गाँधी नहीं लगा हुआ था? चाहे सोनिया हों या प्रियंका गाँधी वाड्रा, आखिर किस हैसियत से ये लोग उन हत्यारों को रिहा करने या उनकी सजा कम करने की बात करती हैं?
बाईं ओर हैं राजीव गाँधी के जले हुए कपडे (साभार विकीपीडिया)- पलानिस्वामी इनसे कह सकेंगे कि राजीव गाँधी के कातिल आज़ादी का हक़ रखते हैं?

राजीव गाँधी: PM जो मर कर वापस हुआ ‘ज़िंदा’, जिसे कॉन्ग्रेस ही नहीं दिला सकी ‘न्याय’

इन चुनावों में राजीव गाँधी यकायक मुद्दा बन गए- चुनावी भी, चर्चा का भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भ्रष्टाचारी कहा, शेखर गुप्ता ने ‘डैशिंग, बाल-बच्चों वाला, युवा प्रधानमंत्री’, और सैम पित्रोदा के अनुसार उनकी जिंदगी में अर्थ ही राजीव गाँधी के भारत में कंधे पर कम्प्यूटर ढो कर लाने से आया।
राजीव गाँधी

‘राजीव गाँधी के कातिलों को छोड़ना है, जनता की है यही माँग… राज्यपाल को भेज दिया है प्रस्ताव’

राजीव गाँधी की हत्या मामले के षड्यंत्रकारियों के खिलाफ टाडा एक्ट के तहत मुकदमा चला था। सभी 26 आरोपियों को चेन्नै की टाडा अदालत ने 1998 में मृत्युदंड दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट में केवल चार मुख्य आरोपियों के लिए मृत्युदंड कायम रखा गया।
1984 सिख विरोधी दंगा

1984 दंगा नहीं, राजीव गाँधी के आदेश पर कॉन्ग्रेसियों द्वारा किया गया नरसंहार था: पूर्व DGP

पढ़िए 1984 सिख दंगों को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के विचार, उन्हीं के शब्दों में। सुलखान सिंह लिखते हैं कि दंगा वो होता है, जहाँ दोनों तरफ से मारकाट की गई हो लेकिन 1984 में राजीव गाँधी के इशारे पर एकतरफा नरसंहार किया गया था, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा।
राजीव गाँधी

जब राजीव गाँधी ने INS विराट की स्टोरी दबाने के लिए मीडिया का गला घोंटने की ठानी थी

निरूपमा सुब्रह्मण्यन द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में लिखे गए लेख की हेडलाइन ही स्पष्ट करती है कि प्रधानमंत्री मोदी आईएनएस विराट पर बात करके हमारे समक्ष सवाल छोड़े हैं ताकि हम पूछें कि वास्तव में अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किसने किया है?
1984 के सिख दंगों में राजीव गाँधी की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत हैं

प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने दिए थे सिखों की हत्या के आदेश: सीनियर एडवोकेट फूलका

नरसिम्हा राव ने शांति भूषण के आग्रह पर किसी उच्चपदस्थ मंत्री से बात की थी लेकिन उधर से दंगों को रोकने के लिए सेना की तैनाती के संबंध में कोई उत्तर नहीं मिला जिसके बाद राव चुप हो गए थे तब शांति भूषण वहाँ से चले गए थे।

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