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राजीव गाँधी के सभी हत्यारे 30 साल बाद जेल से बरी: SC ने सुनाया फैसला, 1 घंटे में रिहाई मिली

कोर्ट का आदेश आने के एक घंटे बाद ही उम्रकैद की सजा काट रहे सभी दोषियों को रिहाई मिल गई। इससे पहले दोषी पेरारिवलन को पहले ही इस मामले में रिहा किया जा चुका है। उसकी रिहाई जेल में उसके अच्छे बर्ताव को देखकर की गई थी।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (11 नवंबर 2022) सारे दोषियों को रिहा करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर दोषियों पर किसी और मामले में आरोप न हों तो सारे दोषियों को रिहा किया जाता है।

जस्टिस बीआर गवई और बीवी नागरत्न की पीठ ने अपना यह निर्णय दिया और केस की दोषी नलिनी, संथन, मुरुगन, श्रीहरण, रॉबर्ट पयास और रविचंद्रन को जेल से रिहा किया। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से राज्यपाल ने इस पर कदम नहीं उठाया इसलिए वह इस पर निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने आर्टिकल 142 का हवाला देते हुए कहा कि मामले के एक दोषी की रिहाई का आदेश बाकी दोषियों पर भी लागू होगा।

जानकारी के मुताबिक कोर्ट का आदेश आने के एक घंटे बाद ही उम्रकैद की सजा काट रहे सभी दोषियों को रिहाई मिल गई। इससे पहले दोषी पेरारिवलन को पहले ही इस मामले में रिहा किया जा चुका है। उसकी रिहाई जेल में उसके अच्छे बर्ताव को देखकर की गई थी। इसके बाद बाकी दोषियों ने भी उसी आदेश का हवाला देकर रिहाई माँगी थी जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया।

राजीव गाँधी की हत्या और दोषियों को सजा

बता दें कि राजीव गाँधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान धनु नाम के लिट्टे आत्मघाती हमलावर ने की थी। वह राजीव गाँधी को फूलों का हार पहनाने के बाद उनके पैर छूने के बहाने आगे आया और झुककर उसने कमर पर बंधे विस्फोटक को ब्लास्ट कर दिया। धमाके में राजीव गाँधी समेत कई लोगों की मौत हुई थी।

1999 में इस मामले में 26 लोगों को मृत्युदंड दिया गया। इनमें से 19 को पहले ही बरी कर दिया गया जबकि बाकी 7 सजा काटते रहे और इनकी सजा उम्रकैद कर दी गई। इनमें से नलिनी गर्भवती थीं जिन्हें सोनिया गाँधी ने ये कहकर माफ किया कि उनकी गलती की सजा उनके बच्चे को नहीं दी जा सकती जो अभी जन्मा ही नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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