विषय

Ram Mandir

‘अयोध्या पर फ़ैसला अगर पक्ष में आए तो भी मस्जिद बनना मुमकिन नहीं, ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाए’

मध्यस्थता के लिए आयोजित इस बैठक का कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध भी किया। इत्तेहादुल मुस्लिम मजालिस संगठन ने होटल के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि जब 18 नवम्बर तक फ़ैसला आ जाएगा तो उससे पहले मध्यस्थता का क्या मतलब है?

वराह, कमल, विक्रमादित्य, हाथी: राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में फॅंसीं बाबरी मस्जिद की पैरोकार

एएसआई की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट के सवालों का साफ-साफ जवाब नहीं दे पाईं मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा। कमल के निशान, खुदाई में वराह की मूर्ति मिलने जैसे कई सबूतों पर अदालत ने पूछे थे सवाल। अष्टकोणों को भी हिन्दू धर्म का मानने से कर दिया इनकार।

SC ने पूछा- राम का जन्म कब? मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- मैं शनि के प्रभाव में हूँ

पराशरण ने कहा कि अगर लोगों को विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्य शक्ति है तो इसे न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है। उन्होंने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है जिसकी पूजा की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट में फिर खड़े हुए रामलला के 92 वर्षीय वकील, दलीलों से मुस्लिम पक्षकार पस्त

पराशरण ने बताया कि मूर्ति अपने-आप में भगवान नहीं है, लेकिन स्थापना के बाद उसमें दिव्यता आ जाती है। उन्होंने बताया कि ऐसी मूर्ति में स्थापित ईश्वर लोगों की भावनाओं और आस्थाओं का प्रतीक होते हैं। उन्हें समर्पित की गई चल व अचल संपत्ति के भी वह स्वामी होते हैं।

विज्ञान नहीं है पुरातत्व, राम मंदिर पर ASI की रिपोर्ट महज एक त्रुटियुक्त विचार: SC में वरिष्ठ वकील

वरिष्ठ वकील ने कहा कि चूँकि, आर्किओलॉजी एक नेचुरल साइंस नहीं है, इसके रिपोर्ट्स में यथार्थता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुरातत्व विभाग ने अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, जिसे वेरीफाई किया जा सके। उन्होंने इसे त्रुटिपूर्ण और विरोधाभास भरा करार दिया।

अयोध्या में बाबर ने राम मंदिर बनवाया था? – 3 ​सूरतों पर गौर कर रहा है सुप्रीम कोर्ट

"अगर विवादित स्थल पर इतिहास में कोई मंदिर था तो वह कब गायब हो गया होगा, किसी को नहीं पता। यह ढाँचा 19वीं सदी तक भारत के किसी अन्य सामान्य मस्जिद की तरह ही था, विवाद के बाद यह चर्चित हो गया।"

रामायण में कहीं भी जन्मस्थान का जिक्र नहीं, 1949 से शुरू हुई पूजा: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार

मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है।

सेक्युलर सरकारों ने हिंदुओं को बनाया दोयम दर्जे का नागरिक, मंदिरों की संपत्ति पर किया कब्जा

मंदिरों की संपत्ति तो पहले ही सरकारी कब्जे में है। सबसे ज्यादा ज़मीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा गया है, लेकिन सरकार मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है।

रामलला की सैलरी ₹1000 प्रतिदिन, लोगों ने पूछा- हर महीने दान में मिलने वाले ₹6 लाख कहाँ जाते हैं?

​बीते महीने यूपी सरकार ने रामलला के फंड में इजाफा किया था। यह जान आप हैरत में पड़ जाएॅंगे कि 3,800 रुपए की मामूली बढ़ोतरी 1992 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। मुख्य पुजारी के वेतन में हजार और अन्य कर्मचारियों का वेतन 500 रुपए बढ़ाया गया है।

…अल्लाह का सम्मान नहीं किया तो भारत के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे: सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षकार

धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष सिर्फ़ यहाँ राम का जन्म होने की बात करते हैं, लेकिन उनकी अर्जी में कहीं भी उस क्षेत्र की बाउंड्री का जिक्र नहीं है। पूरी विवादित जमीन जन्मस्थान नहीं हो सकती। कुछ तो निश्चित स्थान होगा। पूरा क्षेत्र जन्मस्थान नहीं हो सकता।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें