सिद्धारमैया के फैसले का भारी विरोध भी हो रहा था, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेसी सरकार बुरी तरह से घिर गई थी। यही नहीं, इस फैसले की जानकारी देने वाले ट्वीट को भी मुख्यमंत्री को डिलीट करना पड़ा था।
जयराम रमेश ने कहा है कि आरक्षण की सीमा को 50% से बढाकर उसे संविधान की नवीं अनुसूची में डालना पर्याप्त नहीं है क्योंकि देश के कोर्ट इसकी समीक्षा कर सकते हैं और इस पर रोक लग सकती है।
अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन SC-ST आरक्षण में क्रीमीलेयर लाने के पक्ष में हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस वर्ग का छोटा का अभिजात्य समूह जो वास्तव में पिछड़े व वंचित हैं उन तक लाभ नहीं पहुँचने दे रहा है।